- महाकाल मंदिर का नंदी हॉल बदलेगा रूप, 20 लाख की लागत से होगा सौंदर्यीकरण; सावन से पहले पूरा करने की तैयारी
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती के नाम पर फिर ठगी, गुजरात की दो महिलाओं से 42 हजार रुपए वसूले; पुलिस ने शुरू की जांच
- शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन के शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 1000 लीटर से ज्यादा तेल चढ़ा; घाटों से हटाए गए कपड़े और जूते-चप्पल
- “मैं पापा के साथ जाऊंगा…”: उज्जैन कोर्ट में मासूम की जिद के बाद पिता संग भैरवगढ़ जेल पहुंचा 4 साल का बच्चा
- बाबा महाकाल के दरबार में पहुंची भारतीय महिला क्रिकेट टीम, कप्तान हरमनप्रीत कौर समेत खिलाड़ियों ने भस्म आरती में लिया आशीर्वाद
युवक ने शिप्रा नदी में कूदकर की आत्महत्या
इंदौर का युवक शिप्रा में कूदा, सुसाइड नोट में लिखा
मैं कुछ न कर पाया हूं अब जीने की इच्छा नहीं
उज्जैन।इंदौर में रहने वाले युवक ने त्रिवेणी के पुराने छोटे पुल से नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली। नागझिरी पुलिस ने नदी से शव बरामद कर उसके पेंट की जेब से पर्स बरामद किया जिसमें सुसाइड नोट लिखा था। मृतक की फोटो सोशल मीडिया ग्रुप में डालने पर शिनाख्त हो पाई। युवक ने सुसाइड नोट में लिखा था कि मैं परिवार के लिये कुछ न कर पाया। अब जीने की इच्छा नहीं है।
विजय पिता रमेश राव 23 वर्ष निवासी रामनगर भमोरी इंदौर कॉलेज का छात्र था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण मां उससे काम धंधा करने के लिये कहती थी। 11 जून को वह घर पर बिना बताये कहीं चला गया। बड़े भाई मुकेश ने बताया कि विजय रात तक घर नहीं लौटा तो थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। साथ ही घर पर उसके बैग की तलाशी ली जिसमें एक सुसाइड नोट लिखा था। विजय ने उसमें लिखा कि मेरे मरने के बाद फोटो भी घर में मत लगाना न ही माला डालना। परिजन उसकी तलाश करते हुए उज्जैन भी पहुंचे। यहां रामघाट पर आरक्षक मोहन सिंह को विजय का फोटो भी दिखाया, लेकिन उसका सुराग नहीं मिला था।
सेट पर लाश मिलने की सूचना से अलर्ट हुआ आरक्षक
सुबह त्रिवेणी छोटे पुल के पास अज्ञात युवक का शव मिलने की सूचना का सेट पर प्रसारण हुआ तो आरक्षक मोहन सिंह अलर्ट हुआ। उसने नागझिरी पुलिस से संपर्क कर मृतक के फोटो मोबाइल पर मंगाये। यही फोटो विजय के परिजनों को मैसेज किये जिस पर उन्होंने शिनाख्त की और तुरंत उज्जैन पहुंचे।
दूसरा सुसाइड नोट पुलिस को मिला
विजय ने सुसाइड नोट लिखा- दिल में जीने की इच्छा नहीं, मेरा सिर परिवार को मत देना। बेरोजगारी से परेशान आ चुका हूं। परिवार के लिये कुछ नहीं कर पाया। मुकेश ने बताया कि विजय करीब तीन वर्ष पहले भी घर छोड़कर उज्जैन आ गया था। उसे तलाश कर घर ले गये थे।