- उज्जैन के गजनीखेड़ी में प्रशासन की चौपाल: कलेक्टर-SP ने रात गांव में बिताई, मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया
- सुबह 4 बजे खुले कपाट: बाबा महाकाल का दूध-दही-घी से अभिषेक, भक्ति में डूबे श्रद्धालु
- उज्जैन में दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल: दूल्हे ने लौटाए 50 लाख के कैश और सोना, सिर्फ अंगूठी ली
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर खुले चांदी द्वार, बाबा का हुआ पंचामृत अभिषेक
- सिंहस्थ के लिए पुलिस को तैयार कर रहा प्रशासन: उज्जैन में पुलिस अफसरों की 21 दिन की खास ट्रेनिंग शुरू, 41 विषयों पर रहेगा फोकस; 117 अधिकारी बनेंगे “मास्टर ट्रेनर”
युवक ने शिप्रा नदी में कूदकर की आत्महत्या
इंदौर का युवक शिप्रा में कूदा, सुसाइड नोट में लिखा
मैं कुछ न कर पाया हूं अब जीने की इच्छा नहीं
उज्जैन।इंदौर में रहने वाले युवक ने त्रिवेणी के पुराने छोटे पुल से नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली। नागझिरी पुलिस ने नदी से शव बरामद कर उसके पेंट की जेब से पर्स बरामद किया जिसमें सुसाइड नोट लिखा था। मृतक की फोटो सोशल मीडिया ग्रुप में डालने पर शिनाख्त हो पाई। युवक ने सुसाइड नोट में लिखा था कि मैं परिवार के लिये कुछ न कर पाया। अब जीने की इच्छा नहीं है।
विजय पिता रमेश राव 23 वर्ष निवासी रामनगर भमोरी इंदौर कॉलेज का छात्र था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण मां उससे काम धंधा करने के लिये कहती थी। 11 जून को वह घर पर बिना बताये कहीं चला गया। बड़े भाई मुकेश ने बताया कि विजय रात तक घर नहीं लौटा तो थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। साथ ही घर पर उसके बैग की तलाशी ली जिसमें एक सुसाइड नोट लिखा था। विजय ने उसमें लिखा कि मेरे मरने के बाद फोटो भी घर में मत लगाना न ही माला डालना। परिजन उसकी तलाश करते हुए उज्जैन भी पहुंचे। यहां रामघाट पर आरक्षक मोहन सिंह को विजय का फोटो भी दिखाया, लेकिन उसका सुराग नहीं मिला था।
सेट पर लाश मिलने की सूचना से अलर्ट हुआ आरक्षक
सुबह त्रिवेणी छोटे पुल के पास अज्ञात युवक का शव मिलने की सूचना का सेट पर प्रसारण हुआ तो आरक्षक मोहन सिंह अलर्ट हुआ। उसने नागझिरी पुलिस से संपर्क कर मृतक के फोटो मोबाइल पर मंगाये। यही फोटो विजय के परिजनों को मैसेज किये जिस पर उन्होंने शिनाख्त की और तुरंत उज्जैन पहुंचे।
दूसरा सुसाइड नोट पुलिस को मिला
विजय ने सुसाइड नोट लिखा- दिल में जीने की इच्छा नहीं, मेरा सिर परिवार को मत देना। बेरोजगारी से परेशान आ चुका हूं। परिवार के लिये कुछ नहीं कर पाया। मुकेश ने बताया कि विजय करीब तीन वर्ष पहले भी घर छोड़कर उज्जैन आ गया था। उसे तलाश कर घर ले गये थे।