- CM मोहन यादव के विजन को रफ्तार: विक्रम विश्वविद्यालय ने शुरू किया अभियान, फार्मा कंपनियों को जोड़ने और स्टूडेंट्स को स्किल्ड बनाने पर फोकस
- सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज: रेल से आने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था पर फोकस, अधिकारियों ने किया स्टेशनों का निरीक्षण
- महाकाल में तड़के भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा, गूंजा जय श्री महाकाल
- महाकाल के दरबार में सेलिब्रिटीज की मौजूदगी: रवि किशन और जानकी बोड़ीवाला ने किए दर्शन, मांगी देश-प्रदेश की खुशहाली
- भस्म आरती में महाकाल का दिव्य स्वरूप: भांग-चंदन से हुआ श्रृंगार, श्रद्धालुओं की भीड़
शिप्रा नदी की दुर्दशा के खिलाफ आंदोलन पर मंथन
उज्जैन। मोक्षदायिनी मां शिप्रा की दुर्दशा से संत समाज आक्रोशित है। बुधवार को उज्जैन के समस्त संतों ने बैठक कर शिप्रा की शिप्रा की दुर्दशा के खिलाफ आंदोलन पर मंथन किया। षट्दर्शन संत मंडल, उज्जैन की अगुवाई में बैठक भगवान दत्तात्रेय अखाड़ा परिसर (दत्त अखाड़ा) रामघाट पर आयोजित होगी।
षटदर्शन संत मंडल के वरिष्ठ सदस्य महंत डा. रामेश्वरदास ने बताया कि शिप्रा जल को निर्मल और शुद्ध किए बिना, शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त किए बिना उज्जैन में विकास के दावे करना बेमानी है। महंत डा. रामेश्वर दास ने बताया कि संत समाज सिंहस्थ पूर्व से ही इंदौर से बहकर उज्जैन आने वाले गंदे पानी को ओपन नहर के माध्यम से शिप्रा नदी में मिलने से रोकने की मांग करता रहा है। राज्यशासन शासन के कतिपय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने संतजनों की इस मांग को दरकिनार कर पाईप लाइन के जरिए डायवर्शन की योजना को लागू किया। लगभग 150 करोड़ रूपए की यह योजना औचित्यहीन होकर रह गई है। अब तो स्थिति यह है कि स्नान पर्वो के अवसर पर बिना नर्मदा का जल लाए स्नान कराना असंभव हो गया है।