- एमपी बजट 2026-27: सिंहस्थ के लिए 13,851 करोड़ का प्रस्ताव, उज्जैन में 3,060 करोड़ के नए विकास कार्य; 4.38 लाख करोड़ के कुल बजट में सिंहस्थ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस
- महाशिवरात्रि पर महाकाल में आस्था का सैलाब: 2 दिन में 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे, शीघ्र दर्शन से 62.50 लाख की आय; 1.95 करोड़ के 410.6 क्विंटल लड्डू प्रसाद की बिक्री
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती, सभा मंडप से गर्भगृह तक गूंजा “जय श्री महाकाल”: स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट, पंचामृत अभिषेक और भव्य श्रृंगार के साथ हुए दिव्य दर्शन!
- महाशिवरात्रि पर महाकाल को अर्पित हुआ पुष्प सेहरा, दोपहर में हुई विशेष भस्म आरती; चार प्रहर पूजन के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार
- उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 की शुरुआत: महाशिवरात्रि से 19 मार्च तक चलेगा सांस्कृतिक महापर्व, सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया उद्घाटन; ‘शिवोह्म’ संगीत संध्या से सजी पहली शाम
शिप्रा मैया संकट में:वो नंबर-1 इंदौर है जो नाले को फिर नदी बनाने की ओर है और एक हम हैं…जहां गंदगी से खुद मोक्ष मांग रही शिप्रा
मोक्षदायिनी शिप्रा, पौराणिक काल से यह पूजनीय और आस्था का प्रवाह रही है। इसकी हालत हम ही नाले में तब्दिल करने से बाज नहीं आ रहे। दूसरी तरफ इंदौर है जहां गंदे नाले को नदी जैसा स्वच्छ बनाया जा रहा है। इंदौर में शिप्रा जैसी नदी नहीं है इसलिए वहां से रहवासी शहर के सीवरेज को बहाने वाले नाले को नदी में बदलने में जुटे हैं। कई जगह इसमें सफलता भी मिली है।
यह शर्म की बात है कि हमारे पूर्वजों ने जिस पवित्र और स्वच्छ शिप्रा को हमें सौंपा था, हम उसमें रोज कचरा डाल कर नाले में बदलने में लगे हैं। नगर निगम ने शहर की जीवन रेखा कही जाने वाली शिप्रा को साफ रखने के लिए अमला तैनात किया है। घाटों पर विसर्जन कुंड और डस्टबिन आदि की व्यवस्था की है। बावजूद श्रद्धालु पूजन सामग्री, फूल आदि नदी में विसर्जित कर इसे गंदा कर रहे हैं। निगम ने शिप्रा के पानी को स्वच्छ करने के लिए फव्वारे भी लगाए हैं। यदि शिप्रा में कचरा डालने का सिलसिला नहीं रुका तो वह दिन दूर नहीं जब यह पवित्र नदी भी नाले में बदल जाएगी। जरूरत यह है कि शिप्रा को साफ रखने में हम निगम के मददगार बनें।