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सिद्धवट पर पितरों को दूध चढ़ाने के लिए सड़क तक लाइन, 25 हजार उमड़े
उज्जैन | श्राद्ध की चौदस व सर्वपितृ अमावस्या पर पितृ शांति के लिए मंगलवार को भैरवगढ़ स्थित सिद्धवट पर दूध चढ़ाने वालों व गयाकोठा पर तर्पण करने वालों की मंदिर से लेकर बाहर सड़क तक 500 मीटर लंबी लाइन लग गई। देशभर से उमड़े 25 हजार श्रद्धालुओं ने शिप्रा में स्नान-दान कर पंडितों से पिंडदान-तर्पण, पूजन आदि कराया।
सिद्धवट पर तड़के 5 बजे से ही लोग दूध चढ़ाने पहुंचना शुरू हो गए थे। दोपहर में लाइन बढ़कर सड़क तक पहुंच गई। गयाकोठा पर भी सप्तऋषि मंदिर पर लोग दूध चढ़ाने व पितरों के निमित्त तर्पण करने पहुंचे। यहां भी बाहर सड़क पर काफी लंबी लाइन थी। तीर्थ पुरोहित पं. राजेश त्रिवेदी ने बताया मंगलवार को सुबह चौदस व दोपहर में अमावस्या तिथि लगने से हजारों लोग दूध चढ़ाने व तर्पण के लिए उमड़े। सिद्धवट मंदिर के पुजारी सुरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया चौदस पर अधिक भीड़ को देखते हुए मंदिर में पीतल का पात्र लगाकर दूध चढ़ाने की व्यवस्था की गई थी। बुधवार को भी दान-पुण्य की अमावस्या होने से बड़ी संख्या में लोग यहां पूजन व नहान के लिए उमड़ेंगे।
गयाकोठा मंदिर से लेकर लाइन सड़क तक आ गई। इनसेट सिद्धवट मंदिर में लगे पीतल के पात्र में भगवान को दूध अर्पित करते हुए श्रद्धालु।
पार्वती ने सिद्धवट की पूजा की
चौदस व अमावस्या पर यूं तो देशभर के तीर्थों में लोग पितरों की शांति के लिए पूजन-तर्पण के लिए उमड़ते हैं लेकिन देश के चार प्राचीन वटवृक्ष में उज्जैन का सिद्धवट एक होने व माता पार्वती द्वारा यहां पूजन किए जाने, कार्तिक स्वामी का मुंडन संस्कार यहां होने जैसे कई कारणों से इसका पूजा-अनुष्ठान आदि के लिए विशेष महत्व है। पर्वों पर यहां देश के कौने-कौने से लोग पूजा कराने आते हैं।
गयाकोठा और रामघाट पर पितरों का मोक्ष
सिद्धवट पर प्रेतशिला घाट पर श्राद्ध में पिंडदान, तर्पण, नागबलि, नारायण बलि, कालसर्प दोष आदि पूजा का महत्व है। रामघाट व अंकपात के पास प्राचीन गयाकोठा तीर्थ पर पिंडदान-तर्पण से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए लोग उज्जैन के इन तीनों तीर्थ में जाकर पूजन-अर्चन करते हैं।