- CM मोहन यादव ने क्षिप्रा घाटों का किया निरीक्षण: बोले- श्रद्धालुओं की सुविधाओं में नहीं हो कोई कमी, 200 मीटर पर सुविधा केंद्र बनाने के दिए निर्देश
- मिस इंडिया एक्सक्विजिट ईशा अग्रवाल पहुंचीं महाकाल: भस्म आरती में शामिल होकर किया पूजन, देश की खुशहाली की कामना
- उज्जैन दौरे पर CM: सपत्नीक अंगारेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे, विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान का कियाअभिषेक; सेन समाज कार्यक्रम के बाद छिंदवाड़ा रवाना होंगे!
- महाअष्टमी पर महामाया मंदिर से शुरू हुई नगर पूजा: 28 किमी तक चली मदिरा की धारा, संत-महंतों की रही मौजूदगी; श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
- महाकाल की दिव्य भस्म आरती: चांदी के पट खुलते ही गूंजे जयकारे, शेषनाग मुकुट और मुण्डमाला से हुआ श्रृंगार
हाथी पैर नाम से मशहूर है 500 साल पुराना इमली का पेड़, पक्षी आशियाना सहित राहगीरों को मिलता है छांव
सार
विस्तार
उज्जैन शहर में एक ऐसा अनोखा इमली का पेड़ है, जिसे हाथी पैर के नाम से जाना जाता है। इस पेड़ का तना इतना मोटा है कि लगता है जैसे कोई हाथी खड़ा हो यह पेड़। जहां आसपास के रहने वाले और यहां से गुजरने वाले लोगों को छाया प्रदान करता है। वहीं, दूसरी ओर इस पेड़ के मोटे तने में कई पक्षियों ने अपना घोंसला भी बना रखा है।
राजस्व कॉलोनी में आदिम जाति कल्याण विभाग के सामने की ओर स्थित एक इमली के पेड़ की जो कि लगभग 500 साल पुराना है। इस पेड़ की खासियत यह है कि जो भी इसे देखता है, वह इसे देखता ही रह जाता है। क्योंकि यह पेड़ काफी विशालकाय है। क्षेत्र के लोगों से जब इस पेड़ के बारे में बातचीत की गई तो उनका कहना था कि वर्षों से हम इस पेड़ को इसी तरह देख रहे हैं। आम लोगों के लिए भले ही यह एक पेड़ होगा, लेकिन हम लोगों को इस पेड़ से अत्यधिक लगाव है। क्योंकि इस पेड़ की छाया में क्षेत्र के रहवासियों की कई पीढ़ियां अपना बचपन बीता चुकी हैं। आज भी हम इसे पेड़ मानने की बजाय एक पारिवारिक सदस्य के रूप में मानते हैं। पहले तो सब कुछ ठीक-ठाक था, लेकिन अब वर्तमान में इसे संरक्षित करने की आवश्यकता है।
धार और मांडव में पाए जाते हैं इस प्रकार के विशालकाय वृक्ष : मोहरे
इस बारे में वन विभाग के अधिकारी मदन मोहरे बताते हैं कि इस प्रकार के इमली के पेड़ अधिकतर धार और मांडव क्षेत्र में देखने को मिलते हैं। लेकिन यह शहर का एकमात्र ऐसा पेड़ है, जो कि इतना विशालकाय है। इस पेड़ से मिलने वाले इमली के फल का उपयोग सबसे अधिक आयुर्वेदिक पद्धति से होने वाले उपचार के लिए होता है। इस इमली को पहले सुखाया जाता है और फिर इसके पाउडर का उपयोग किया जाता है।