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CM मोहन यादव ने क्षिप्रा घाटों का किया निरीक्षण: बोले- श्रद्धालुओं की सुविधाओं में नहीं हो कोई कमी, 200 मीटर पर सुविधा केंद्र बनाने के दिए निर्देश
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को उज्जैन दौरे के दौरान क्षिप्रा नदी तट पर निर्माणाधीन घाटों का स्थल निरीक्षण किया और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महापर्व में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर और व्यवस्थित सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्री अंगारेश्वर और श्री सिद्धवट के बीच विकसित किए जा रहे नए घाटों का अवलोकन करते हुए निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने घाटों पर मूलभूत सुविधाओं को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि घाट के लगभग 200 मीटर क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए वस्त्र परिवर्तन की समुचित व्यवस्था की जाए और सुविधाजनक स्थानों पर पर्याप्त संख्या में शौचालय बनाए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने प्रमुख घाटों पर हर 200 मीटर की दूरी पर सुविधा केंद्र विकसित करने की बात कही, ताकि स्नान के लिए आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए भी ठोस इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लगभग 500 मीटर के अंतराल पर सीढ़ियां या अन्य पहुंच मार्ग विकसित किए जाएं, जिससे घाटों तक पहुंचना आसान हो और भीड़ प्रबंधन में भी सहायता मिले। उन्होंने घाटों की संरचना को इस तरह विकसित करने पर जोर दिया, जिससे एक साथ बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित तरीके से स्नान कर सकें।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्री सिद्धवट और श्री अंगारेश्वर मंदिर के बीच बन रहे पुल का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि इस पुल के तैयार होने से दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच आवागमन सरल हो जाएगा और श्रद्धालुओं को एक वैकल्पिक मार्ग मिलेगा, जिससे भीड़ का दबाव भी कम होगा। साथ ही घाटों को लगभग 5 मीटर चौड़ा बनाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान के साथ बैठने और ठहरने की पर्याप्त सुविधा मिल सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि घाटों के आसपास बैठने की व्यवस्था, साफ-सफाई, सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन को एक आदर्श धार्मिक नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित अनुभव मिल सके।