- उज्जैन के गजनीखेड़ी में प्रशासन की चौपाल: कलेक्टर-SP ने रात गांव में बिताई, मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया
- सुबह 4 बजे खुले कपाट: बाबा महाकाल का दूध-दही-घी से अभिषेक, भक्ति में डूबे श्रद्धालु
- उज्जैन में दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल: दूल्हे ने लौटाए 50 लाख के कैश और सोना, सिर्फ अंगूठी ली
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर खुले चांदी द्वार, बाबा का हुआ पंचामृत अभिषेक
- सिंहस्थ के लिए पुलिस को तैयार कर रहा प्रशासन: उज्जैन में पुलिस अफसरों की 21 दिन की खास ट्रेनिंग शुरू, 41 विषयों पर रहेगा फोकस; 117 अधिकारी बनेंगे “मास्टर ट्रेनर”
268 साल पुरानी परंपरा:गवली समाज के युवाओं ने लाठियों से पीटकर किया घमंडी कंस का वध
शहर में रविवार को 268 वर्ष पुरानी परंपरा का निर्वहन किया गया। कंस दशमी के अवसर पर रात 12 बजे गवली समाजजनों द्वारा लाठियों से पीटकर कंस के पुतले का वध किया गया। इसके पहले सोमवारिया बाजार में देव और दानवों के बीच वाकयुद्ध का आयोजन किया गया। इसमें देव और दानवों का किरदार निभा रहे कलाकारों ने ज्वलंत मुद्दे भी उठाए।
कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए इस वर्ष यह आयोजन किया गया कंस वधोत्सव समिति के संयोजक तुलसीराम भावसार ने बताया कंस वधोत्सव के चलते रात 10 बजे से सोमवारिया बाजार में देव और दानवों का रूप धरे कलाकारों के बीच वाकयुद्ध शुरू हुआ। दानव ने अपने संवादों से लोगों को रोमांचित कर दिया।
इसी बीच राक्षसी अट्टाहस देर शाम से लेकर रात 12 बजे तक गूंजायमान रहे। सैकड़ों लोग सोमावारिया बाजार में देर रात तक डटे रहे। इसके बाद रात 12 बजे गवली समाज के युवा सोमवारिया बाजार स्थित कंस चौराहा पर कंस दरबार में पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण का जयघोष लगाते हुए कंस के पुतले का डंडो और लाठियों से पीट-पीटकर वध कर दिया और सोमबारिया बाजार से घसीटते हुए नई सड़क पर ले गए।