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47/84 श्री नूपुरेश्वर महादेव
47/84 श्री नूपुरेश्वर महादेव
एक बार भगवान शंकर का गण नूपुर इंद्र की सभा में पहुंचा। वहां अप्सराएं नृत्य कर रही थी। नूपुर ने काम के वश में आकर उवर्शी को फूल फेककर मारा, जिससे उवर्शी क्रोधित हो गई। कुबेर ने क्रोधित होकर नूपुर को मृत्युलोक में गिरने का श्राप दिया। वह पृथ्वी पर गिर पड़ा। तभी मनसा देवी ने प्रकट होकर नूपुर से कहा कि तुम महाकाल वन में जाओं ओर दक्षिण भाग में स्थित शिवलिंग का पूजन करो। नूपुर तुरंत महाकाल वन में गया और शिवलिंग का पूजन किया। शिवजी ने प्रसन्न होकर कहा कि नूपुर तुम्हारा कल्याण होगा। नूपुर के पूजन करने से यह शिवलिंग नूपुरेश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुआ। मान्यता है कि जो भी मनुष्य शिवलिंग के दर्शन कर पूजन करता है वह सभी रोग व दुखांे से मुक्त होता है।