- सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज, इंदौर-देवास से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग पार्किंग और रूट प्लान तैयार करने के निर्देश; संभागायुक्त बोले- घाट निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं, समयसीमा में काम पूरा करें
- उज्जैन में पंचकोशी यात्रा शुरू: महापौर ने नागचन्द्रेश्वर से किया शुभारंभ, 25 हजार श्रद्धालु पहुंचे
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा, जयकारों से गूंजा परिसर
- महाकाल मंदिर पहुंचे सुनंदा शर्मा और मनीष मल्होत्रा: नंदी हॉल से किए दर्शन, लिया आशीर्वाद
- एक्ट्रेस सारा अर्जुन ने महाकाल में की भस्म आरती: सुबह 4 बजे पहुंचीं, 2 घंटे तक रहीं शामिल
50/84 श्री स्थावरेश्वर महादेव
50/84 श्री स्थावरेश्वर महादेव
विश्वकर्मा की संज्ञा नामक पुत्री सूर्य की पत्नी थी। सूर्य का तेज न सह पाने के कारण उसने अपने समान एक अन्य स्त्री को उत्पन्न किया ओर उसे आज्ञा दी की तुम सुर्य की सेवा करना ओर उन्हे मेरा पता कभी मत बताना। सूर्य ने उस स्त्री को अपनी पत्नी संज्ञा माना ओर उससे एक पुत्र हुआ, जिसका नाम शनैश्चर हुआ। शनैश्चर के प्रभाव से सभी भयभीत हो गए। इंद्र ब्रम्हदेव के पास पहुंचे ओर शनैश्चर के प्रभाव से सभी रक्षा करने की बात कही। ब्रम्हदेव ने सूर्य को समस्या बताई। सूर्य ने कहा कि आप ही शनिदेव को समझाएं, वह मेरी बात नहीं सुनता है। ब्रम्हदेव ने भगवान कृष्ण को यह समस्या बताई। कृष्ण ने देवों व ब्रम्हा को महादेव के पास जाने के लिए कहा। भगवान शंकर ने शनैश्चर को बुलाया ओर कहां कि तुम पृथ्वी लोक के प्राणियों को पीडा पहुंचा परंतु उनका कल्याण भी करना। बारह राशियों में अलग- अलग स्थानांे पर रहने से तुम्हारा अलग अलग प्रभाव होगा। अब तुम महाकाल वन में जाओं ओर पृथुकेश्वर के पश्चिम में स्थित लिंग का पूजन करों। वह लिंग तुम्हारे नाम स्थावर के नाम से स्थावरेश्वर के नाम से विख्यात होगा। शनैश्चर महाकाल वन में आए ओर शिवलिंग के दर्शन कर पूजन किया। मान्यता है कि जो भी मनुष्य स्थावरेश्वर का पूजन करता है वह सदा स्वर्ग में निवास करता है ओर उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ओर ग्रह दोष नही लगता है।