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श्रावण महोत्सव : सुर, सितार और कथक की त्रिवेणी
उज्जैन | महाकाल मंदिर के प्रवचनधाम में रविवार को पहले श्रावण महोत्सव की शाम कलाकारों ने रंग जमा दिया। शहर के नगाड़ा वादक नरेंद्र कुशवाह ने मंगल वाद्यों से आरती, जबलपुर के विवेक कर्महे का गायन, दिल्ली की स्वाति का कथक और दिल्ली के ही मेहताब अली का सितार वादन श्रोताओं व दर्शकों को बांधने में सफल रहा। भास्कर के पाठकों के लिए इन प्रस्तुतियों का कवरेज किया शहर के जाने-माने कलाकारों ने।
मेहताब अली- सितार के क्लिष्ट बोलो की निकासी व लयकारी
भिंडी बाजार घराने के एक मात्र तंत्र वाद्य परंपरा के दूसरे प्रतिनिधि कलाकार मेहताब अली न्याजी ने शुरुआत राग गावती में आलाप, जोड़ आलाप तथा झाला से की। उस्ताद विलायत खान की मध्यलय बंदिश प्रस्तुत की। समापन राग मिश्र पहाड़ी में आरती- ओम जय जगदीश हरे… से किया। तीन सप्तकों में कुशलता पूर्वक हस्त संचालन, सितार के क्लिष्ट बोलों की निकासी, क्लिष्ट लयकारी कलाकार की अथक साधना को सिद्ध करता है। सितार जैसे मिजराब युक्त बोल प्रधान वाद्य में गायकी (कंठ की बारिकियों), अंग को प्रहार से प्रदर्शित करना चुनौती पूर्ण है। जिस भिंडी बाजार घराने का प्रतिनिधित्व मेहताब अली करते हैं वह मूलत: गायकी का ही घराना है। अली के दादा-दादी इसी घराने के गायक व तथा पिता उस्ताद मोहसीन अली खान एक तंत्र वादक हैं। मेहताब अली ने वाद्य की परिभाषा- वदति इति वाद्यं, को सार्थक किया। तबला संगति रामचंद्र चौहान ने की।
– डॉ. विनीता माहुरकर, सहायक व्याख्याता (सितार)