- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
ये बगीचा नहीं कब्रिस्तान है…पांच साल में रोपे 1000 पौधे, जो पेड़ बन गए, अब यहीं के गुलाब चढ़ाते हैं कब्र पर
उज्जैन | यह जान्सापुरा में बोहरा समाज का कब्रिस्तान है। पांच साल में समाज के लोगों ने इसे निखारने के लिए यहां पर एक हजार पौधे रोपे। बकौल अध्यक्ष शहर आमिल जनाब इस्हाक भाईसाहब 9.50 बीघा में फैले कब्रिस्तान में गुलाब की बगिया है तो रात में महकने वाली रातरानी भी है। कब्रों पर चढ़ाए जाने वाले गुलाब भी यहीं उगाए जाते हैं। इसके अलावा अशोक, नीम, गुलमोहर, मीठा नीम और फल-फूल के पौधे हैं। फोटो अशोक मालवीय
नंगे पैर चलते हैं घास पर
बुजुर्गों की जियारत के लिए आने वाले लोगों का मॉर्निंग वॉक भी यहीं होने लगा है। वे नंगे पैर चायना ग्रास पर चलते हैं।
तालाब का सौंदर्यीकरण करेंगे
कब्रिस्तान में एक पुराना तालाब भी है। समाज के लोगों ने अब इसके सौंदर्यीकरण की बात कही है।