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गुरु गोबिंदसिंह जयंती आज… सात दिन तक घर से बाहर जंगल में बिताते हैं लोग
इतिहास में क्रांतिकारी संत के नाम से फैलाया उजियारा, पूरे परिवार ने किया बलिदान
उज्जैन. गुरु गोविंद सिंह जी सिखों के दसवें गुरु हैं। इतिहास में गुरु गोविंदसिंह एक विलक्षण क्रांतिकारी संत व्यक्तित्व के नाम से जाने जाते हैं। वे एक महान कर्म प्रणेता, अद्वितीय धर्मरक्षक, ओजस्वी वीर होने के साथ ही संघर्षशील वीर योद्धा भी थे। उनके पूरे परिवार ने बलिदान दिया था, जिसे याद करते हुए आज भी पंजाब में लोग सात दिन तक घर से बाहर जंगल में बिताते हैं। ०२ जनवरी को गुरु गोबिंदसिंह जी की जयंती है।
भक्ति और शक्ति, ज्ञान और वैराग्य, मानव समाज का उत्थान, धर्म और राष्ट्र के नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए त्याग एवं बलिदान की मानसिकता से ओत-प्रोत अटूट निष्ठा तथा दृढ़ संकल्प की अद्भुत प्रधानता गुरु गोबिंदसिंहजी में थी। तभी स्वामी विवेकानंद ने गुरुजी के त्याग एवं बलिदान का विश्लेषण करने के बाद कहा कि ऐसे ही व्यक्तित्व के आदर्श सदैव हमारे सामने रहना चाहिए। गुरुनानक देवजी की ज्योति इनमें प्रकाशित हुई, इसलिए इन्हें दसवीं ज्योति कहा जाता है। बिहार की राजधानी पटना में गुरु गोबिंद सिंहजी का जन्म 1666 ई. को हुआ था। सिख धर्म के नौवें गुरु तेगबहादुर साहब की इकलौती संतान के रूप में जन्मे गोबिंद सिंह की माता का नाम गुजरी था।
संत टोडरमल का सदैव ऋणी रहेगा सिख समाज
जत्थेदार सुरेंद्रसिंह अरोरा ने गुरु गोबिंदसिंहजी की जयंती पर विशेष चर्चा में कहा कि गुरु गोबिंदसिंहजी के दो साहेबजादों को दीवार में चुनवा दिया गया था। उनके अंतिम संस्कार के लिए कहीं कोई जगह नहीं दी जा रही थी, तभी जैन समाज के संत टोडरमल ने वहां के शासक से कहा कि आप जितनी राशि चाहें, मुझसे ले लो, तो शासक ने कहा कि सोने की खड़ी अशर्फियां आप जितनी जगह पर रखेंगे, वह जगह आपकी हो जाएगी। उन्होंने वैसा ही किया, और दोनों साहेबजादों के लिए जमीन पर खड़ी सोने की अशर्फियां बिछा दीं। उसी जगह पर दोनों का ससम्मन अंतिम संस्कार किया। इनका यह ऋण पूरा सिख समाज कभी नहीं उतार पाएगा।
हरियाणा से आज उज्जैन आएगा रागी जत्था
सरदार सुरेंद्रसिंह अरोरा ने बताया कि गुरु गोबिंदसिंह जी के जयंती अवसर पर गुरुवार को हरियाणा से रागी जत्था उज्जैन पहुंचेगा। जो कि सज्जनसिंहजी के नेतृत्व में राजस्थान व अन्य प्रांतों की यात्रा करते हुए यहां पहुंच रहा है। आगर रोड पर अगवानी की जाएगी।
यह यात्रा क्षिप्रा तट स्थित गुरु नानक घाट गुरुद्वारा पहुंचेगी। वहीं फ्रीगंज स्थित गुरुद्वारा में सुबह से पंजाब के रागी जत्थे द्वारा कीर्तन व अरदास की जाएगी। लंगर के आयोजन होंगे।