- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
बैंडबाजे वालों ने प्रशासन को सुनाई बेरोजगारी की धुन
जब से लॉकडाउन हुआ, तब से बैंडबाजे वालों के सुर बिगड़ गए। 22 मार्च से उनके व्यवसाय की बैंड बज गई।
जब से लॉकडाउन हुआ, तब से बैंडबाजे वालों के सुर बिगड़ गए। 22 मार्च से उनके व्यवसाय की बैंड बज गई। कोरोना संक्रमण के दौर में शहनाई वादकों से लेकर ट्रॉली खींचने वाले, दूल्हे के आजूबाजी रोशनी लेकर चलने वाले, जनरेटर धकाने वाले भी घर बैठे हैं। अब जब अनलॉक की स्थिति बनी, शहर में दुकानें खुल गई, यहां तक कि शादियां भी होने लगी, लेकिन बैंड बाजे वालों का व्यवसाय अब भी ठप ही है। आखिर थक हार कर ये लोग प्रशासन के पास पहुंचे और अपनी बेरोजगारी की धुन सुनाई।
न्यू राम दरबार बैंड के आरिफ हुसैन के साथ अन्य बैंड संचालक अपनी मांग का ज्ञापन सौंपने कोठी पहुंचे। उन्होंने कहा कि समस्त बैंड संचालक 22 मार्च से व्यवसायहीन होकर बैठे हैं। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन होने से हमारा व्यवसाय पूरी तरह से बंद है। उन्होंने कहा कि हमारा व्यवसाय सीजनल है। धार्मिक एवं मांगलिक कार्यक्रमों के अलावा अंतिम शवयात्रा में ही हमारा व्यवसाय चलता है। चूंकि हमारे व्यवसाय का सीजन आरंभ होने ही वाला था कि अचानक कोरोना आ गया और हमारा व्यवसाय महामारी की भेंट चढ़ गया। अब यही अनुरोध लेकर आपके पास आए हैं कि नियमों-निर्देशों के तहत हमारे बैंड व्यवसाय को भी अनुमति प्रदान करें, जिस प्रकार विवाह के लिए 50 लोगों की अनुमति दी गई है, उसी प्रकार बैंड बाजे वालों के लिए 8 से 10 लोगों की अनुमति दी जाए।
इस व्यवसाय से जुड़े दो हजार लोग प्रभावित
करीब 25 बैंड संचालकों ने आवेदन में उल्लेख किया है कि हम पर हमारा अधीनस्थ स्टॉफ, जिसमें कर्मचारी, कारीगर जो लगभग 2 हजार लोग हैं, इस व्यवसाय को बंद होने की वजह से जीवन यापन के लिए परेशानियों से जूझ रहे हैं। भूखे मरने की नौबत आ गई है।