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पहली बार खुले मैदान में गेहूं का भंडारण, अफसरों ने कहा- जरूरत पड़ने पर एक साल रख सकते हैं
शहर में पहली बार खुले मैदान में गेहूं का भंडारण किया है। वह भी पूरे वैज्ञानिक तरीके से। अफसरों का कहना है भले ही खुले आसमान के नीचे उपज रखी है लेकिन इसे बारिश से कोई खतरा नहीं है। जरूरत पड़ने पर इसे एक साल के लिए रखा जा सकता है। समर्थन मूल्य पर गेहूं की बंपर खरीदी के बाद जिले के भंडार गृह कम पड़ गए। जिले में 6.50 लाख टन भंडारण क्षमता है। इसमें से 1.50 लाख में पुराने चने रखे हैं। ऐसे में उस स्थान पर गेहूं का भंडारण नहीं किया जा सकता। यही वजह है प्रशासन ने नानाखेड़ा स्टेडियम को भंडारण के लिए चुना। भंडारण का काम पूरा होने को है।
जिला आपूर्ति अफसर एमएल मारू के अनुसार यहां 20 हजार टन गेहूं का भंडारण किया जाएगा। नानाखेड़ा स्टेडियम की तरह हासामपुरा में कच्चे कैप तैयार किए हैं। जिला सहकारी विपणन संघ और मार्कफेड ने नानाखेड़ा स्टेडियम को खुला वेयर हाउस बनाया है। कच्चा कैप बनाकर गेहूं और चने की बोरियां रखकर बारिश से सुरक्षा की जा रही है। अफसरों का कहना है मानसून शुरू होने से गेहूं को सुरक्षित रखना मुश्किल था। इस वजह से नानाखेड़ा स्टेडियम का उपयोग वेयर हाउस के रूप में किया है।
ऐसे बनाया नानाखेड़ा काे खुला गोदाम
- पहले मैदान की ठोस लेवलिंग की।
- रेती और गिट्टी से भराव किया।
- जमीन से डेढ़ फीट ऊंचा भराव करने के बाद दो बोरी की थप्पी लगाई।
- उसके ऊपर सीधे गेहूं की बोरियां जमाकर रख दी।
- थप्पी लगने के बाद उसे ऊपर से मोटी तिरपाल से ढंक दिया।
- हाल ही में हुई बारिश के बाद भी थप्पियों में नमी नहीं आई है।