- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
कई और नए दुर्लभ कश्यप ना पैदा कर दे यह सोशल मीडिया
रात के 1.30 बजे जब पूरे उज्जैन में सन्नाटा पसरा था उस समय पुराने शहर का एक हिस्सा गोलियों की आवाज़ से गूंज रहा था। आपसी विवाद ने गैंगवार का स्वरुप लिया और 19 साल के अल्प आयु वाले शहर के कुख्यात बदमाश दुर्लभ का अंत हो गया। इस हत्याकांड ने शहर के लोगों को अखिलेश व्यास हत्याकांड से लेकर लाला त्रिपाठी हत्याकांड तक की याद दिला दी। परन्तु कल रात हुआ हत्याकांड इन सब से बिलकुल अलग रहा।
इस गैंगवार, इस गैंग और इस गैंग का मास्टरमाइंड का जन्म किसी चौराहे की दुकान पर बैठकर रंगदारी या हफ्तावसूली से नहीं अपितु सोशल मीडिया के दिखावे से हुआ। यह मामला हमारे समाज और माता-पिता के लिए कई सवाल छोड़ गया। दुर्लभ कश्यप, महज 19 साल का एक पढ़े-लिखे परिवार का लड़का सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से स्वयं की दहशत पूरे शहर में स्थापित करना चाहता था। इस राह पर वो इतना आगे निकल गया जहां से जीवित वापस लौटना असंभव था। यह पूरा काण्ड इंटरनेट और सोशल मीडिया के युग में पूरे शहर के माता पिता के लिए एक सबक है की आप अपने बच्चों को कम उम्र में मोबाइल फ़ोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया का एक्सपोजऱ तो दें परन्तु उसके साथ ही उन पर अंकुश रखना और उनकी गतिविधियों पर बारीक नजऱ रखना बेहद जरूरी हो गया है।
आपका बच्चा सोशल मीडिया पर क्या एक्टिविटी करता है, क्या पोस्ट करता है और सोशल मीडिया के माध्यम से किन लोगों के संपर्क में आ रहा है और क्या सीख रखा है यह सारी छोटी छोटी बातें विचार करने की है। पहले के समय में जब बच्चों या युवाओं के जो दोस्त बनते थे उन दोस्तों से केवल घर के एक सदस्य का व्यक्तिगत संपर्क नहीं होता था अपितु उनके माता-पता और परिवार को भी हम जानते थे। आज स्थिति एकदम विपरीत है। आज के समय में अधिकांश माता-पिता को यह नहीं पता होता की उनका बच्चा कैसे लोगों के संपर्क में है और यही छोटी छोटी नजऱअंदाज़ की गई बातें आगे चलकर एक बड़ा रूप ले लेती हैं जिसका ताज़ा उदाहरण पूरे शहर को आज सुबह पता चल गया। आगे यही उम्मीद की जा सकती है की इस हत्याकांड से सबक लेकर माता पता अपने बच्चों के लिए समय भी निकालेंगे और उनकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में भी विचार करेंगे।