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महाकाल मंदिर के स्ट्रक्चर की नींव व फाउंडेशन की मजबूती जांचने के लिए जीपीआर से ली इमेज
ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के स्ट्रक्चर की मजबूती जांचने के लिए बुधवार को नींव और फाउंडेशन की ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार से जांच की गई। यह मशीन जमीन के नीचे की सतह के हालचाल बताती है। मशीन इमेज लेती है। इनका विश्लेषण कर विशेषज्ञ पता करते हैं कि भवन का फाउंडेशन कितना मजबूत है। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की यह जांच कर रहा है। इनके विशेषज्ञों का कहना है कि अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। विश्लेषण के बाद पूरी रिपोर्ट (करीब 5 महीने बाद) सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी। संस्थान ने ही अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि मंदिर परिसर की जांच कर बताया था कि मंदिर निर्माण के लिए कैसा फाउंडेशन होना चाहिए।
महाकालेश्वर मंदिर के स्ट्रक्चर की मजबूती को लेकर पूर्व में सुप्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ समिति ने मंदिर प्रबंध समिति को सुझाव दिया था मंदिर के स्ट्रक्चर पर ज्यादा लोड नहीं डाला जाना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने स्ट्रक्चर की मजबूती जांचने के लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की को पाबंद किया था। सीबीआरआई की टीम ने एक साल पहले स्ट्रक्चर की प्राथमिक जांच की थी। 1 सितंबर को कोर्ट ने मंदिर प्रबंध समिति को कहा था कि सीबीआरआई से स्ट्रक्चर की दोबारा जांच कराए। कोर्ट के निर्देश पर सीबीआरआई की टीम मंगलवार को उज्जैन आई है। यह टीम तीन दिन जांच करेगी। गुरुवार को भी टीम जांच का सिलसिला जारी रखेगी। इसके बाद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करेगी। विशेषज्ञों का मानना है रिपोर्ट 5 महीने में तैयार हो जाएगी। जांच दल में डॉ अचल मित्तल, देबदत्त घोष, ऋषभ अग्रवाल व दीपक धर्मशक्तु शामिल हैं।
सुबह 6 बजे मंदिर पहुंच गई थी सीबीआरआई की टीम, 12 घंटे तक चलता रहा जांच का सिलसिला
सीबीआरआई की टीम सुबह 6 बजे मंदिर पहुंच गई थी। सबसे पहले ओंकारेश्वर परिसर में जांच का सिलसिला शुरू हुआ। मशीन से परिसर के पिलर्स और फर्श की जांच की गई। इसके बाद ओंकारेश्वर के ऊपरी हिस्से, नागचंद्रेश्वर मंदिर परिसर, महाकाल गर्भगृह में जांच हुई। हर जगह 2 से 3 घंटे तक मशीन को चलाकर जमीन की भीतरी सतह की इमेज ली गई। दीवारों, पिलर्स पर भी मशीन चलाई गई। शाम 6 बजे तक जांच चलती रही। इसके बाद विशेषज्ञ टीम के साथ मंदिर के प्रशासक एसएस रावत, यूडीए अधिकारियों, आर्किटेक्ट, पुजारी व अन्य अधिकारियों ने बातचीत की। प्रशासक ने विशेषज्ञों को बताया कि मंदिर परिसर में भविष्य में क्या नए निर्माण प्रस्तावित हैं तथा इससे दर्शनार्थियों को क्या सुविधा मिलेगी।
जमीन की गहराई व पत्थर के भीतर झांक लेता है रेडार, इमेज में बता देता है टूट-फूट या खराबी
जांच में ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) का उपयोग किया गया। इस मशीन से निकली किरणें गहराई तक जाकर इमेज बनाती हैं। मशीन को पत्थर के पिलर या दीवार पर लगाने से वह उसकी भीतरी स्थिति की इमेज तैयार करती है। अंदर से पत्थर में टूट-फूट या कोई खराबी आई है, यह पता चल जाता है। इस मशीन से ली गई इमेजेस का कंप्यूटरों में विश्लेषण होगा। वैज्ञानिक उनका अध्ययन कर रिपोर्ट बनाएंगे। विशेषज्ञों का कहना था मंदिर का पुराना स्ट्रक्चर है। इसलिए इसकी जांच अलग तरह से की गई है। अयोध्या में नया परिसर बनना है इसलिए उसकी जांच संस्थान की ही एक टीम ने की थी, वह इससे कुछ अलग थी।