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उज्जैन:हाल-ए-सिग्नल- RTO चौराहा पर लोगों को समझ नहीं आता है कि जाए या फिर रुके
ग्रीन और रेड दोनों लाइट एक साथ चालू
चौराहा पर लगे सिग्नल कब Green,Yellow और Red होंगे पता ही नहीं चलता है
उज्जैन।शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए स्मार्ट सिटी द्वारा नानाखेड़ा चौराहा, कोयला फाटक चौराहा, आरटीओ चौराहा, महामृत्युंजय द्वार, गाड़ी अड्डा चौराहा, आगर नाका चौराहा पर स्मार्ट सिग्नल लगाए गए हैं, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के कारण कुछ सिग्नलों का सिस्टम ही गड़बड़ा गया है।
चौराहा पर लगे सिग्नल कब ग्रीन, यलो और रेड होंगे पता ही नहीं चलता है। ग्रीन और रेड लाइट दोनों एक साथ जलने से लोगों को समझ नहीं आता कि वे रुके या जाए। जिससे टै्रफिक जाम होने के साथ दुर्घटनाएं होने की भी संभावनाएं बनी रहती है। देवास रोड आरटीओ चौराहा पर लगे ट्रैफिक सिग्नलों के यही हाल है। इन दिनों सिग्नल की लाल और हरी लाइट दोनों एक साथ चालू रहती है। इससे वाहन चालक भ्रमित होकर स्टॉप लाइन पार कर जाते हैं और रोज जाम के हालात बन रहे हैं। आईटीएमएस (इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) के तहत बिना प्लानिंग के आनन-फानन में ये सिग्नल लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं, वहीं नानाखेड़ा चौराहा पर लगे सिग्नल कभी भी बंद और फिर चालू हो रहे हैं। इससे वाहन चालक परेशान और भ्रमित हो रहे हैं। दरअसल, शहर में ट्रैफिक नियम तोडऩे वाले वाहन चालकों पर ई-चालानी कार्रवाई तो की जा रही है, लेकिन चौराहों पर लगाए गए इन सिग्नलों की सुरक्षा व्यवस्था में यातायात विभाग और स्मार्ट सिटी कंपनी ने कोई इंतजाम नहीं किए हैं। जिससे कुछ ट्रैफिक सिग्नल बारिश के पानी से खराब हो गए हंै।
यह है कमियां
लंबी दूरी….आरटीओ चौराहा पर लगे दोनों सिग्नल करीब 100 मीटर की दूरी के दायरे में है, जिससे वाहन चलाने के लिए खुला क्षेत्र मिलता है। इसमें क्षेत्र का कोई निर्धारण नहीं, वाहन चालक को जहां जगह मिलती है, वहीं से वाहन आगे बढ़ा लेता है।
रोटरी नहीं… सिग्नल पर रोटरी आदि कि कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे भी दुर्घटनाएं होने की संभावना रहती है।
बैरिकेड्स रखने से बड़ी परेशानी
इन दिनों आरटीओ चौराहा पर लगे सिग्नल पर एक तरफ सड़क के बीच में बैरिकेड्स रख दिए गए हैं। जिससे भी लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।