- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
लॉकडाउन का एक साल:सितंबर में सबसे ज्यादा, फरवरी में नीचे, मार्च में फिर चढ़ा कोरोना ग्राफ
लॉकडाउन का एक साल। जिन रास्तों पर पिछले साल सन्नाटा था, वहां जनजीवन सामान्य है लेकिन कोरोना का खौफ पिछले साल जैसा ही है। उज्जैन में पहला पॉजिटिव मरीज मार्च में सामने आया था। प्रदेश की पहली मौत भी इसी महीने उज्जैन में हुई थी। शुरुआत में पॉजिटव का आंकड़ा कम रहा लेकिन सितंबर, अक्टूबर दो महीने ऐसे थे जब मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी। एक साल में ऐसा रहा कोरोना का ग्राफ…
टॉवर चौक के दो चेहरे…लाकडाउन में सन्नाटा था, अब यहां पहले जैसी ही चहल-पहल है
पहली तस्वीर: यह उज्जैन का सबसे व्यस्त क्षेत्र टॉवर चौराहा है, जहां लॉकडाउन के दौरान (24 मार्च 2020) सन्नाटा था।
- 22 मार्च: को जनता कर्फ्यू के बाद 24 मार्च को कलेक्टर ने जिले में लॉकडाउन घोषित कर दिया। महाकाल सहित शहर के अन्य सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया गया।
- 23 अप्रैल: पहली बार एक ही दिन में 43 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद सख्ती कर दी गई।
- 30 मई: अनलॉक-1 के तहत दुकानें खुलने की शर्तों के साथ दो दिन की छुट दी गई।
दूसरी तस्वीर: टॉवर क्षेत्र की ली गई यह फोटो (23 मार्च 2021) की है। यहां पर रौनक लौट आई हैं और शाम होते ही यहां मेले जैसा माहौल रहता है।
- 26 अप्रैल: कोरोनो का असर थोड़ा कम होने पर 16 उद्योगों को शुरू करने की अनुमति दी गई थी।
- 8 जून: अनलॉक का दूसरा फेज 8 जून से शुरू हुआ। महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं को तीन महीने बाद दर्शन की छूट मिली।
- 6 जुलाई: श्रावण में महाकालेश्वर की सवारियों का क्रम छोटे मार्ग पर शुरू किया गया, जिनमें श्रद्धालुओं को प्रवेश पर रोक लगी रही।
- कहानी कोरोना योद्धा की; संक्रमित हुए, इलाज करवाया और फिर से मरीजों की सेवा में जुट गए
जिला अस्पताल में आरएमओ डॉ. जीएस धवन अस्पताल की व्यवस्थाओं को संभालने के साथ ही मरीजों को चिकित्सा सेवाएं देते आए हैं, इस दौरान वे संक्रमित भी हो गए। होम क्वारेन्टाइन होकर इलाज करवाया। स्वस्थ्य होकर फिर से मानवता का फर्ज निभाना शुरू कर दिया। जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर के नहीं होने पर खुद ही मरीजों का इलाज किया।
कोरोना से मुक्त तीन गांव…जिले के ग्राम लिंबादित, सामगी व हरनावदा ऐसे गांव है जहां पर ग्रामीणों ने अपनी गाइड लाइन तय कर कोरोना को अपने गांव में घूसने तक नहीं दिया। गांवों से बाहर जाना बंद किया। सोशल डिस्टेंसिंग रखी। बाहरी लोगों से दूरी बनाई।