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वेद परिवार को सैल्यूट:चारों भाई-भतीजे 24 घंटे ऑक्सीजन की रिफिलिंग में जुटे
कोरोना के गंभीर रोगियों को वक्त रहते ऑक्सीजन मिल सके इसके लिए वेद परिवार भोजन-पानी व आराम करने का वक्त तक भूल गया है। राघौपिपल्या के प्लांट पर चारों भाई व भतीजे 24 घंटे गैस रिफिलिंग के कार्य में जुटे रहते हैं। यह पूछने पर कि आराम कब करते है, खाना कब खाते हैं, इसके जवाब में कहते हैं कि जब ऑक्सीजन नहीं होती है तो थोड़ी देर सुस्ताते हैं, तभी खाना भी खा पाते हैं। वरना पहली प्राथमिकता तो जरूरतमंदों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की ही रहती है, ताकि लोगों की जानें बचाई जा सके।
राघौपिपल्या-गंगेड़ी क्षेत्र में इस 13 टन क्षमता के रिफिलिंग प्लांट की शुरुआत मालीपुरा निवासी प्रदीप वेद ने 2014 में की थी। तब से अब तक प्लांट को कभी भी छह घंटे से अधिक चलाने की जरूरत नहीं पड़ी। इतने वक्त में ही शहर के अस्पताल व उद्योगों में ऑक्सीजन की आपूर्ति हो जाती थी। लेकिन कोरोना महामारी में पहली बार प्लांट कई दिनों से दिन-रात 24 घंटे चलाना पड़ रहा है।
किसी को भी पलभर की फुर्सत नहीं मिलती
पहले प्लांट पर अकेले प्रदीप वेद ही आया करते थे। लेकिन अब उनके भाई जयंत वेद, कमलेश वेद व हर्षद वेद के अलावा पुत्र जय वेद व भावेन वेद को भी यहां जुटना पड़ा है। इनमें से किसी को भी पलभर की फुर्सत नहीं है। कोई रिफिलिंग में तो कोई काउंटिंग व लोडिंग-अनलोडिंग व काउंटर-लेखा-जोखा आदि के काम में व्यस्त है। एक सवाल पर जयंत वेद कहते हैं कि जब माल नहीं होता है तभी घंटे-दो घंटे नींद निकाल लेते हैं। भावेन वेद कहते हैं कि खाना तो घर जाकर ही करते हैं लेकिन तुरंत फिर लौट आते हैं। प्रदीप वेद कहते हैं उनका संयुक्त परिवार है। कोई भी बाहर का खाना नहीं खाता है।
कर्मचारियों का समर्पण, डबल ड्यूटी कर रहे
वेद परिवार को अपने कर्मचारियों पर भी फख्र है। कहते हैं कि सात कर्मचारी हैं। आठ-आठ घंटे की इनकी पारी है। बावजूद जरूरत के हिसाब से इन्होंने भी कभी मायूस नहीं किया। सोमवार को जरूरत पड़ने पर कर्मचारी अमित तिवारी दूसरी पारी में भी काम करने को भी तैयार हो गया। इधर प्रशासन की तरफ से ऑक्सीजन के नोडल अधिकारी डीआईसी के जीएम एसआर सोनी ने कहा कि वेद परिवार की सक्रियता से कई लोगों की जिंदगी बचाने में मदद मिल रही है। राजस्व विभाग की तरफ से यहां तैनात आलोक चौरे कहते हैं कि इस परिवार का हर सदस्य घंटों तक अपने काम में जुटा हुआ है।