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धर्म समाज:साध्वीश्री ने पोषध कर्तव्य का समझाया सार
साध्वीवर्या श्री शुद्धि प्रसन्ना, श्री प्रवृध्दि, श्री समृद्धि की निश्रा में आयोजित पर्वाधिराज पर्यूषण के दौरान प्रवचन माला में तीसरे दिन रविवार को साध्वी श्री प्रवृद्धि ने पौषध रूपी कर्तव्य का अधिकार का विस्तार समाजजनों को बताया। पौषध याने जो धर्म को पुष्ट बनाए, जो आत्मा को पुष्ट बनाए, जो पाप का शोषण और पुण्य का पोषण करें, जो आत्मा को स्वभाव में विचार करें जो आत्मगुणों के प्रकटीकरण में निमित्त रूप बने उसका नाम पौषध है।
संक्षेप में पौषध याने आंरभ-सभारंभ को छोड़कर (साधु जैसा जीवन)गुरु महाराज के चरणों में रहकर दिन और रात या सिर्फ दिन में या रात में केवल धर्म ध्यान करना बताया। पौषध यानि संयम जीवन की नेट प्रैक्टिस। जानकारी समाज के अशोक नाहर ने देते हुए बताया कि कल्पसूत्र याने जैन धर्म का महान ग्रंथ, जैन धर्म की गीता, जीवन जीने की संजीवनी, आचार धर्म को सिखाने वाली पाठशाला, तप, त्याग एवं संयम को दर्शाने वाला अपूर्व खजाना याने कल्पसूत्र। कल्पसूत्र को ज्ञानियों ने कल्पवृक्ष की उपमा भी दी है। जैसे कल्पवृक्ष सर्व लोगों के मनोरथ पूर्ण करता है वैसे ही यह कल्पवृक्ष रूपी कल्पसूत्र भी भव्य जीवों को सर्व प्रकार से मनोवांछित फल देने वाला है। 21 बार श्रवण करने वाले श्रावक-श्राविका को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पर्यूषण महापर्व : प्रभु की हुई आकर्षक अंगरचना
शनिवार रात प्रभु की आकर्षक अंगीरचना की गई और लाभार्थी परिवार, समाजजनों द्वारा आरती कर पूजन किया। अजीतनाथ जैन मंदिर एवं वासुपूज्य तारकधाम जैन मंदिर में प्रभु की अंगीरचना एवं आरती की गई। लाभार्थी क्रमशः नेमीचंद बसंतीलाल भंडारी, दिलीप कुमार कैलाशचंद परिवार रहे। रात को दोनों मंदिरों में संगीतमय भक्ति की गई। पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व के दौरान सोमवार से पवित्र आगम ग्रंथ कल्पसूत्र का वाचन प्रारंभ होगा। इसके पूर्व लाभार्थियों द्वारा ग्रंथ की पांच ज्ञान पूजा की जाएगी और कमलकुमार धर्मचंद कोठारी परिवार द्वारा साध्वीश्री को समाजजन को श्रवण करवाने के लिए पवित्र कल्पसूत्र ग्रंथ बोहराया जायगा। साध्वीश्री ने समाजजनों को ग्रंथ का श्रवण कराया जाएगा।