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महाकाल मंदिर के सामने अधिग्रहित 11 मकानों का अवार्ड पारित
खाते में मुआवजा के रुपए आते होगा मकानों का अधिग्रहण
मामला महाकाल मंदिर के सामने विस्तारीकरण का, अवार्ड पारित…11 मालिकों को मिलेंगे 12 करोड़ 46 लाख रु.
उज्जैन:महाकाल मंदिर के सामने 11 भवन मालिकों को अपनी जमीन-भवन छोडऩे के एवज में 12 करोड़ 46 लाख रुपये मिलेंगे। राशि मकान मालिकों के बैंक खाते में जमा होने के साथ ही मकानों का अधिग्रहण कर तोडऩे की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्य दो-तीन दिन में होने की संभावना हैं. महाकाल मंदिर के सामने के 11 मकानों के भू-अर्जन की कार्रवाई पूर्ण हो गई है। इसके पहले धारा-37 का सूचना-पत्र जारी कर भवन मालिकों को अधिग्रहित की जाने वाली जमीन-भवन, उसके एवज में दिए जाने वाले भुगतान और जगह खाली करने की जानकारी उल्लेखित होगी। इसके बाद मालिकों के बैंक खाते में राशि जमा होते ही मकानों को तोडऩे की कार्रवाई होगी।
अवार्ड की राशि 12 करोड़ 46 लाख रुपये महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा प्रदान की जाएगी। अधिग्रहण की कार्रवाई पर आपत्तियों का निराकरण करते हुए पारित किए अवार्ड में 1 करोड़ 37 लाख रुपये मकानों के और 11 करोड़ 9 लाख रुपये जमीन के एवज में संबंधितों के बैंक खातों में जमा किए जाएंगे। निर्धारित 11 मकानों की जमीन अधिग्रहित होने से महाकाल क्षेत्र विस्तारीकरण के लिए 1274 वर्गमीटर जमीन उपलब्ध होगी। बता दें कि कलेक्टर आशीष सिंह ने एसडीएम संजीव साहू को निर्देश दिए थे कि वे सात दिन में महाकाल मंदिर के सामने 11 भवनों सहित त्रिवेणी संग्रहालय से चारधाम मंदिर के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए 0.1723 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई प्रारंभ करें।
10 माह से चल रही अधिग्रहण करने की कार्रवाई
पहले राजस्व अमले ने 10 माह पहले महाकाल मंदिर के सामने के 11 भवनों को अधिग्रहित करने के लिए सर्वे रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी थी। रिपोर्ट में सांई फाउंडेशन, जीवी रांगणेकर, आधार गंधे, विकास गंधे, सुशील टीकेकर, विशाल राव, आशीष चंद्रशेखर शर्मा, श्रीधर, अरविंद, निशिकांत गणेश परचुरे परिवार और तेलंग परिवार के मकान की जानकारी दी गई थी।
लोक निर्माण विभाग ने मुआवजा राशि तय की थी। बीच में कोरोना की दूसरी लहर पर लाकडाउन लगने से कार्रवाई ठंडी पड़ गई थी। शहर अनलाक के बाद भी अधिग्रहण की कार्रवाई रुकी पड़ी है। भवन-भूमि के अधिग्रहण के लिए सभी मकान मालिकों को धारा 21 का नोटिस जारी किया था। नपती और मुआवजे को लेकर जो आपत्ति थी उसका जवाब भवन मालिक को 30 दिन में देना था। 13 आपत्तियां राजस्व विभाग को प्राप्त हुईं थीं। कायदे से दो महीने पहले ही आपत्तियों का निराकरण करके मुआवजा देकर जमीन का अधिग्रहण कर लिया जाना था।