- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
शिप्रा नदी की दुर्दशा के खिलाफ आंदोलन पर मंथन
उज्जैन। मोक्षदायिनी मां शिप्रा की दुर्दशा से संत समाज आक्रोशित है। बुधवार को उज्जैन के समस्त संतों ने बैठक कर शिप्रा की शिप्रा की दुर्दशा के खिलाफ आंदोलन पर मंथन किया। षट्दर्शन संत मंडल, उज्जैन की अगुवाई में बैठक भगवान दत्तात्रेय अखाड़ा परिसर (दत्त अखाड़ा) रामघाट पर आयोजित होगी।
षटदर्शन संत मंडल के वरिष्ठ सदस्य महंत डा. रामेश्वरदास ने बताया कि शिप्रा जल को निर्मल और शुद्ध किए बिना, शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त किए बिना उज्जैन में विकास के दावे करना बेमानी है। महंत डा. रामेश्वर दास ने बताया कि संत समाज सिंहस्थ पूर्व से ही इंदौर से बहकर उज्जैन आने वाले गंदे पानी को ओपन नहर के माध्यम से शिप्रा नदी में मिलने से रोकने की मांग करता रहा है। राज्यशासन शासन के कतिपय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने संतजनों की इस मांग को दरकिनार कर पाईप लाइन के जरिए डायवर्शन की योजना को लागू किया। लगभग 150 करोड़ रूपए की यह योजना औचित्यहीन होकर रह गई है। अब तो स्थिति यह है कि स्नान पर्वो के अवसर पर बिना नर्मदा का जल लाए स्नान कराना असंभव हो गया है।