- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
मान सरोवर गेट से मंदिर गर्भगृह तक नहीं हुई जांच:महाकाल में रोज पहुंच रहे लाखों श्रद्धालु, जांच के लिए मेटल डिटेक्टर तक नहीं
श्रावण माह। महाकाल दर्शन के लिए देशभर से रोज ही लाखों श्रद्धालु आ रहे हैं। सामान्य दर्शन कतार में लगकर भास्कर टीम ने सुरक्षा का जायजा लिया। प्रवेश द्वार से महाकाल मंदिर के गर्भगृह तक कहीं भी किसी तरह की जांच नहीं हुई। न ही मेटल डिटेक्टर दिखाई दिए। इस लापरवाही से अगर कोई घटना हुई तो जिम्मेदार कौन होगा? सुरक्षाकर्मी जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता ही कर रहे थे।
श्रावण महीना होने के कारण लाइन थोड़ी लंबी थी, लेकिन आगे चलते ही लाइन दो भागों में बंट गई। परिसर में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पीने के पानी और साथ पूरा कॉरिडोर घूमने के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था भी उपलब्ध थी। मंदिर प्रशासन के लोग पूरे समय श्रद्धालुओं की मदद के लिए खड़े थे। गेट के पास मोबाइल जमा करने के लिए एक काउंटर बना हुआ है और कुछ व्यवस्था कर्मी भी बैठे हैं, इसके बावजूद लोग मोबाइल को साइलेंट करते हुए पर्स में रखकर लाइन में प्रवेश करते दिखे। लाइन में चेकिंग की जा रही थी, वह भी बिना किसी मेटल डिटेक्टर मशीन या स्कैनर की मदद से।
कर्मचारी सिर्फ मैनुअली जांच रहे थे। पुलिसकर्मी लोगों की जेब से बीड़ी, सिगरेट जैसे नशीले पदार्थ निकाल रहे थे। लाइन में चलने के दौरान बारिश की बूंदाबांदी के कारण कुछ जगह फिसलन हो गई थी। ऐसे में यहां गिरने का डर बना हुआ था। लोग एक-दूसरे को पकड़कर लाइन में खड़े रहे। मंदिर तक पहुंचने वाले गलियारों में बारिश के पानी और कीचड़ के कारण परेशानियां बढ़ी जरूर है पर सफाई कर्मी भी लगातार अपने काम में लगे थे। इसके बाद बाबा महाकाल के दर्शन हो गए।