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सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 – तैयारी में जुटा प्रशासन, 1500 कच्चे मकान तोड़ने का फैसला, जल्द शुरू होगा काम
उज्जैन लाइव, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया :
सिंहस्थ कुंभ मेला, जो हर 12 वर्ष में आयोजित होता है, 2028 में एक बार फिर उज्जैन शहर में आयोजित होने वाला है, जिसकी तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। प्रशासन की कोशिश है कि सिंहस्थ से पहले क्षिप्रा नदी को प्रदूषणमुक्त किया जाए, जिसके लिए बड़ा अभियान भी चलाया जा रहा है।
प्रशासन ने सिंहस्थ से पहले क्षिप्रा नदी को प्रदूषणमुक्त करने 600 करोड़ की लागत वाली परियोजना का खाका तैयार किया है। इसमें 11 नए सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) लगाए जाने हैं। साथ ही 450 किलोमीटर लंबी सीवेज लाइन बिछाकर शहर की गंदगी नदी से मिलने से रोकी जाएगी।
जिसके लिए इंदौर प्रशासन ने कान्ह और सरस्वती नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में स्थित लगभग 1,500 कच्चे मकान तोड़ने का फैसला लिया है।
मीडिया से बात करते हुए कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा की – कान्ह और सरस्वती नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में करीब 3,000 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए हैं। इनमें 1500 कच्चे मकान शामिल हैं, जिन्हें नोटिस देकर खुद से अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया है। उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि कान्ह और सरस्वती के 30-30 मीटर के दायरे में स्थित अवैध निर्माण हटाने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। बारिश के चलते इन लोगों को स्थानांतरित करने में देरी हुई है। अगले पांच से दस दिन में इनकी शिफ्टिंग का काम शुरू किया जाएगा।
दरअसल, क्षिप्रा नदी इंदौर के ग्रामीण क्षेत्र से होते हुए उज्जैन पहुंचती है। लेकिन इंदौर की गंदगी कान्ह और सरस्वती नदी के जरिए क्षिप्रा में जाकर मिलती है, जिससे इसमें होने वाले प्रदूषण में इजाफा हो रहा है।