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उज्जैन के श्री अगस्तेश्वर महादेव के आंगन में स्वयंभू है संतोषी माता की प्रतिमा, जाने कैसे प्रकट हुई थी माँ …
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
संतोषी माता देवी दुर्गा का एक दयालु, शुद्ध और कोमल रूप हैं। कमल पुष्प पर विराजमान मां संतोषी जीवन में संतोष प्रदान करने वाली देवी हैं। उन्हें आनंद और संतोष की देवी भी माना जाता है। लोग मां संतोषी की पूजा करने के लिए विशेष रूप से शुक्रवार का दिन चुनते हैं।
हिंदू धर्म की पौराणिक कथा के अनुसार, जब गणेश जी के दोनों पुत्रों ने उनसे कहा कि उन्हें भी एक बहन चाहिए, जिससे वे रक्षा सूत्र बंधवा सकें, तब शुभ-लाभ की इस मनोकामना को पूरा करने के लिए भगवान गणेश ने अपनी शक्तियों से एक ज्योति उत्पन्न की और उसे अपनी दोनों पत्नियों रिद्धि और सिद्धि की आत्मशक्ति के साथ जोड़ दिया। कुछ समय बाद इस ज्योति ने एक कन्या का रूप धारण कर लिया, जो संतोषी कहलाई। तभी से वह कन्या संतोषी माता के नाम से विख्यात हुई।
बता दें, धार्मिक नगरी उज्जैन में हरसिद्धि माता मंदिर के पीछे चौरासी महादेव मंदिरों के क्रम में प्रथम महादेव श्री अगस्तेश्वर महादेव के आंगन में संतोषी माता का प्राचीन मंदिर स्थित है। यहां देवी की प्रतिमा स्वयंभू बताई जाती है। मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के परिवार के एक सदस्य को सैकड़ों वर्ष पहले अगस्तेश्वर महादेव की पूजा करते समय इस स्थान पर देवी प्रतिमा होने का स्वप्न आया था। जब खुदाई की गई तो माता की बैठी हुई मुद्रा में प्रतिमा निकली, तब से इस मंदिर में संतोषी माता विराजमान हैं और भक्तों को दर्शन देकर उनका कल्याण कर रही हैं।