- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
3 छोटी-छोटी कहानियां, ये किसी की भी सोच को दे सकती हैं एक नई दिशा
(1) भगवान बुद्ध का अंत समय आ चुका था। सभी शिष्य एकत्र हुए। अपने शिष्यों के लिए उनका अंतिम संदेश था। हे मित्रों। जब तक तुम सभी संयमी होकर मित्रभाव से रहोगे, एक साथ मिल बांट कर खाओगे और धर्म के रास्ते पर मिल कर चलोगे। तब तक बड़ी से बड़ी विपत्ति आने पर भी तुम नहीं हारोगे, लेकिन जिस दिन तुम संगठित न होकर बिखर कर रहने लगोगे, पराजित हो जाओगे। संगठन में अपार शक्ति है।
(2) इतिहास बताता है कि विश्व विजेता बनने के कगार तक पहुंचने वाले वीर नेपोलियन ने अपनी युवावस्था में लगातार आठ वर्ष तक लेखक बनने की कोशिश की। हर बार उसे असफलता हाथ लगी, उसने रणक्षेत्र में अपनी प्रतिभा आजमाने का निश्चय किया। एक साधारण सैनिक से जीवन आरंभ कर अपनी क्षमता, प्रतिभा व साहस के बल पर वह अपने देश का ही नहीं, अन्य देशों का भी भाग्य विधाता बन गया। किसी को भी असफलता मिलने पर निराश होकर बैठना नहीं चाहिए। किसी न किसी क्षेत्र में सफलता मिलेगी जरूर। बस प्रयासरत रहना चाहिए।