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अब अलग से नहीं देनी होगी Bus Fees, लाखों अभिभावकों को राहत: मध्य प्रदेश में स्कूल फीस पर सरकार की सख्ती, 10% से ज्यादा बढ़ोतरी के लिए लेनी होगी अनुमति।
उज्जैन लाइव, उज्जैन, नितिन शर्मा:
हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा बेहतरीन शिक्षा हासिल करे। लेकिन क्या यह सपना अब सिर्फ एक महंगा सौदा बनकर रह गया है? हर साल बेतहाशा बढ़ती स्कूल फीस और ट्रांसपोर्ट चार्ज से अभिभावकों की जेब पर भारी असर पड़ता है… लेकिन अब सरकार ने इस पर कड़ा कदम उठाया है।
जी हाँ, मध्य प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों की बढ़ती फीस से परेशान अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है! सरकार ने नया नियम लागू कर दिया है, जो स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाएगा। अब राज्य के प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस वृद्धि नहीं हो सकेगी। फीस नियंत्रण अधिनियम के तहत नए नियम लागू कर दिए गए हैं। अभिभावकों के लिए राहत की खबर यह है कि अब बस फीस को वार्षिक फीस में शामिल किया जाएगा और फीस बढ़ोतरी पर नियंत्रण रहेगा। बता दें, सरकार ने यह कदम अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ रोकने और स्कूलों में मनमानी फीस वृद्धि पर नियंत्रण के लिए उठाया है।
बस फीस अब अलग से नहीं लगेगी!
सरकार ने यह साफ कर दिया है कि कोई भी स्कूल अब परिवहन शुल्क (Bus Fees) को अलग से वसूल नहीं कर सकता। यह वार्षिक फीस का हिस्सा होगा, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
कौन-कौन से स्कूल होंगे प्रभावित?
- जिन स्कूलों की वार्षिक फीस ₹25,000 से कम है, उन्हें फीस वृद्धि के दायरे से बाहर रखा गया है।
- हालांकि, बस फीस का नियम सभी स्कूलों पर लागू होगा।
फीस बढ़ाने के लिए नए नियम:
- 10% तक फीस बढ़ाने के लिए कोई अनुमति नहीं चाहिए।
- 15% से ज्यादा बढ़ोतरी के लिए जिला समिति की अनुमति जरूरी।
- नियम न मानने वाले स्कूलों पर होगी कानूनी कार्रवाई।
मध्य प्रदेश में कुल 34,652 निजी स्कूल हैं, जिनमें से 16,000 से अधिक स्कूलों की वार्षिक फीस ₹25,000 से कम है। यह नियम लाखों माता-पिता के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है.