- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
महाकाल मंदिर की सुरक्षा पर संकट! वेतन न मिलने से नाराज़ गार्ड्स ने ड्यूटी पर आना छोड़ा, 6 महीने से नहीं हुआ भुगतान!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है! गार्ड्स की भारी कमी के चलते मंदिर परिसर की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। मंदिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसी क्रिस्टल कंपनी प्रा. लि. के बीच फंसे भुगतान विवाद ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, दो महीने से वेतन न मिलने के कारण गार्ड्स ने ड्यूटी पर आना बंद कर दिया है। केवल प्रमुख गेट पर गिने-चुने गार्ड्स तैनात हैं, बाकी मंदिर परिसर सुरक्षा विहीन पड़ा है। शनिवार से सोमवार तक मंदिर के कई हिस्सों में एक भी गार्ड नजर नहीं आया!
6 महीने से नहीं हुआ भुगतान!
क्रिस्टल कंपनी के मैनेजर राहुल शर्मा के मुताबिक, जुलाई 2024 से दिसंबर 2024 तक मंदिर समिति ने भुगतान नहीं किया है। कंपनी ने अपने स्तर पर गार्ड्स को वेतन देने की कोशिश की, लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि गार्ड्स ने ड्यूटी पर आना ही बंद कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, पिछले छह महीनों में किसी भी प्रशासक ने भुगतान फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिससे मामला लटका रहा। हालांकि, नए प्रशासक प्रथम कौशिक ने पदभार संभाल लिया है और उनके आने के बाद भुगतान की प्रक्रिया की जा रही है।
हालांकि इन सब के बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या शिवरात्रि से पहले सुधरेगी सुरक्षा व्यवस्था? बता दें, शिवनवरात्रि नजदीक है और मंदिर में 17 फरवरी से शिवनवरात्रि का पर्व प्रारंभ हो जाएगा। ऐसे में क्या महाशिवरात्रि से पहले सुरक्षा व्यवस्था बहाल हो पाएगी? या फिर लाखों श्रद्धालु इस लचर सुरक्षा के बीच खतरे के साए में दर्शन करने को मजबूर होंगे?