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“अगर शिवाजी महाराज नहीं होते, तो मेरा नाम कलीमुद्दीन होता!” – कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान, सियासत में मचा घमासान!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में शिवाजी जयंती के मौके पर ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। नेहरू स्टेडियम में आयोजित समारोह में शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद विजयवर्गीय ने कहा, “अगर शिवाजी महाराज नहीं होते, तो मेरा नाम कैलाश नहीं, बल्कि कलीमुद्दीन होता।”
उनका यह बयान सुनते ही सभा में मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। विजयवर्गीय ने कहा कि मालवा की धरती को मुगलों के आतंक से बचाने का श्रेय शिवाजी महाराज और मराठा शासकों को जाता है। अगर शिवाजी नहीं होते, तो मालवा और अन्य हिंदू बहुल क्षेत्रों का इतिहास कुछ और ही होता।
विजयवर्गीय का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि शिवाजी महाराज ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए जिस तरह से सेना बनाई थी, वो अद्भुत था। मुट्ठी भर बहादुर लोगों ने लाखों की फौज को हराया। उन्होंने मुगलों को इस क्षेत्र में घुसने नहीं दिया। विजयवर्गीय ने शिवाजी महाराज की बहादुरी और उनके योगदान को बहुत महत्वपूर्ण बताया और उनके आदर्शों को जिंदा रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “मैं ऐसे कई किस्से बता सकता हूं। मुगलों को खदेड़ते हुए उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा की। मुगलों ने हर जगह कब्जा किया, लेकिन यहां बाजीराव पेशवा की फौज ने मोर्चा संभाला था। जब शिवाजी महाराज नहीं रहे, तब ही अंग्रेज यहां घुस पाए थे।”
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। वहीं, दूसरी और शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज पर आधारित फिल्म ‘छावा’ को मध्यप्रदेश सरकार ने टैक्स फ्री कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद इसकी घोषणा करते हुए कहा कि इस फिल्म से लोगों को संभाजी महाराज के बलिदान और संघर्ष से प्रेरणा मिलेगी।