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महाकालेश्वर के आंगन में सबसे पहले गूंजेगा होली का उल्लास: 13 मार्च को बाबा महाकाल को अर्पित होगा हर्बल गुलाल, पारंपरिक विधि से होगा होलिका दहन; मंदिर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में हर वर्ष की तरह इस बार भी देश में सबसे पहले होली का पर्व पारंपरिक और भव्य रूप से मनाया जाएगा। 13 मार्च को सांध्य आरती के दौरान बाबा महाकाल को गुलाल और अबीर अर्पित किया जाएगा, जिसके साथ ही मंदिर परिसर में होली उत्सव का शुभारंभ होगा। इसके बाद ओंकारेश्वर मंदिर के सामने परिसर में होलिका पूजन और होलिका दहन संपन्न किया जाएगा। बता दें, इस पावन अवसर पर बाबा महाकाल को हर्बल गुलाल और अबीर अर्पित किया जाएगा। साथ ही भगवान को गेंहू की बालियां (ऊंबी) भी चढ़ाई जाएंगी। रामजी पुजारी के अनुसार, होलिका दहन के समय भी गेहूं की बालियां अर्पित की जाएंगी, जो अन्नदाता के प्रति कृतज्ञता और नई फसल के स्वागत का प्रतीक होगा।
सांध्य आरती के बाद पुजारी परिवार की महिलाएं विधि-विधान से होलिका पूजन करेंगी और फिर पूरे भक्तिपूर्ण माहौल में होलिका दहन होगा। इस दौरान मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मंदिर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक भक्त की द्वार पर जांच की जाएगी, ताकि कोई भी रासायनिक रंग या हानिकारक सामग्री मंदिर परिसर में न ला सके।
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य रामजी पुजारी, प्रदीप गुरु और विजय पुजारी ने बताया कि महाकाल नगरी में सबसे पहले होली मनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस बार भी इस परंपरा का भव्य आयोजन होगा। 13 मार्च को सांध्य आरती में पुजारी गुलाल अर्पित करेंगे, जो इस पर्व के आधिकारिक शुभारंभ का संकेत होगा। उसी दिन पुजारी परिवार द्वारा ओंकारेश्वर मंदिर के सामने कंडों की होलिका सजाई जाएगी और साथ ही मंदिर परिसर में भव्य रंगोली भी बनाई जाएगी।
उज्जैन की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और परंपराओं का उत्सव है। जहां पूरे देश में होली खेलने का इंतजार किया जाता है, वहीं महाकाल नगरी में सबसे पहले होली महाकाल के चरणों में अर्पित की जाती है। बाबा महाकाल के भव्य श्रृंगार और भस्म आरती के दौरान जब गुलाल-अबीर उड़ता है, तब हर भक्त खुद को भगवान शिव के रंग में रंगा हुआ महसूस करता है।
इस वर्ष भी बाबा महाकाल के भक्त इस अलौकिक अनुभव के साक्षी बनने के लिए उज्जैन में उमड़ेंगे। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि हर श्रद्धालु महाकाल की इस आध्यात्मिक होली का दिव्य आनंद ले सके।
पिछली घटना से सबक, इस बार विशेष सतर्कता
गौरतलब है कि 25 मार्च 2024 को महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में आग लगने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी, जिसमें पुजारी, पुरोहित और सेवक समेत करीब 14 लोग झुलस गए थे। इस हादसे में सेवक सत्यनारायण सोनी का निधन हो गया था। इस घटना के बाद मंदिर प्रशासन ने गहन जांच के लिए एक समिति गठित की, जिसमें यह सामने आया कि मंदिर प्रोटोकॉल और होली के नियमों का उल्लंघन हुआ था। इसके बाद मंदिर परिसर में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई, जिसमें फायर अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर और फायर सेफ्टी उपकरण शामिल हैं।