- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
उज्जैन: मां बिजासन मंदिर में दंडवत प्रणाम कर बंदर ने त्यागे प्राण, वीडियो वायरल
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में रामनवमी के शुभ दिन एक ऐसी रहस्यमयी और चमत्कारी घटना घटी, जिसने आस्था की गहराइयों को छू लिया। मां बिजासन मंदिर में उस दिन का नज़ारा देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया, जब एक बंदर ने मंदिर में प्रवेश किया, सीधे गर्भगृह की ओर बढ़ा और मां की प्रतिमा के सामने दंडवत प्रणाम कर वहीं अपने प्राण त्याग दिए। यह दृश्य किसी फिल्मी कहानी की तरह नहीं, बल्कि सच्ची घटना है, जिसका वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। लोग इसे ‘ईश्वरीय लीला’ और ‘माता का चमत्कार’ बता रहे हैं।
6 अप्रैल को जब श्रवण कुमार उज्जैनिया मंदिर में रामनवमी की तैयारियों में जुटे थे, तभी एक लड़का दौड़ता हुआ आया और बताया कि एक बंदर माता के सामने बैठा है। जब सभी मंदिर के गर्भगृह पहुंचे तो देखा—एक बंदर मूर्छित अवस्था में माता के चरणों में दंडवत पड़ा हुआ है। श्रद्धालुओं ने उसे उठाने, पानी पिलाने और हरसंभव प्रयास किए, पर वह पूरी तरह शांत था। बंदर ने मानो अपनी अंतिम सांसें मां के चरणों में ली हों।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बंदर पहले मंदिर के शिखर पर लगी ध्वजा के पास कुछ देर बैठा रहा, मानो मां से अनुमति मांग रहा हो। फिर वह मंदिर में आया, बिना किसी व्यवधान के सीधे गर्भगृह में पहुंचा और साष्टांग दंडवत होकर मां को प्रणाम किया। यह दृश्य इतना गहन और आध्यात्मिक था कि हर आंख नम हो गई।
स्थानीय लोग मानते हैं कि यह कोई साधारण घटना नहीं थी—यह माता के चरणों में मोक्ष प्राप्ति का एक दिव्य संकेत था। मंदिर समिति और श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा से उस बंदर का अंतिम संस्कार किया, जैसे किसी भक्त संत को विदाई दी जाती है। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर श्रद्धा की लहर दौड़ चुकी है। लोगों का मानना है कि ऐसा सिर्फ उन्हीं के साथ होता है, जिन पर मां की विशेष कृपा होती है।