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मीसाबंदी, मैकेनिकल इंजीनियर और विनोबा भावे के साथी को इंदौर प्रशासन ने समझा भिक्षुक, उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में एक माह बिताने के बाद सम्मान सहित परिजनों के पास लौटे 72 वर्षीय देवव्रत चौधरी!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
इंदौर को भिक्षुक मुक्त बनाने के अभियान के तहत हुई एक चौंकाने वाली भूल ने पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 15 अप्रैल को इंदौर नगर निगम की टीम ने लक्ष्मी मंदिर, राजबाड़ा क्षेत्र से एक 72 वर्षीय वृद्ध को भिक्षावृति करते हुए उठाया और अन्य लोगों के साथ उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेज दिया। लेकिन जब इस वृद्ध की पहचान सामने आई, तो सभी हैरान रह गए। यह वृद्ध कोई आम भिक्षुक नहीं बल्कि मीसाबंदी (मीसा क़ानून के तहत जेल में रह चुके स्वतंत्रता सेनानी), सामाजिक कार्यकर्ता, गांधीवादी विचारक, और पूर्व मैकेनिकल इंजीनियर देवव्रत चौधरी थे।
देवव्रत चौधरी ने खुलासा किया कि वे विनोबा भावे के साथ काम कर चुके हैं और उन्हें फर्राटेदार अंग्रेज़ी बोलने में महारत हासिल है। उन्होंने बताया कि उनका एक भाई सेना में कर्नल पद से सेवानिवृत्त हुआ है और दूसरा बैंक अधिकारी था। खुद चौधरी ने मुंबई की एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कंपनी में वर्षों तक सेवा दी और उनके खाते में करीब 10 लाख रुपये भी जमा हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने उन्हें बिना जांच के भिक्षुक मान लिया और सेवाधाम आश्रम भेज दिया।
एक माह तक उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में रहने के बाद देवव्रत चौधरी की कहानी जब मीडिया में आई, तो पूरे घटनाक्रम ने तूल पकड़ लिया। खबर छपते ही इंदौर प्रशासन की टीम बुधवार को सेवाधाम आश्रम पहुंची और अपनी भूल स्वीकारते हुए देवव्रत चौधरी को सम्मान सहित उनके परिजनों के पास भेजा। विदाई के समय सेवाधाम आश्रम के संचालक सुधीर भाई गोयल और आश्रम परिवार ने चौधरी को शाल, श्रीफल और साफा पहनाकर सम्मानपूर्वक विदा किया।
देवव्रत चौधरी ने इस दौरान कहा, “अब मैं कभी भी भिक्षावृति नहीं करूंगा। सेवाधाम आश्रम में मुझे जो स्नेह, सम्मान और सेवा मिली, वह मैं जीवन भर नहीं भूलूंगा। अगर भविष्य में कभी मुझे आवश्यकता पड़ी, तो मैं फिर से इस पवित्र स्थान पर आना चाहूंगा।”