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धार्मिक श्रद्धा और आस्था से ओतप्रोत नौका विहार उत्सव का इस्कॉन मंदिर में हुआ शुभारंभ, भगवान राधा-कृष्ण कर रहे हैं चंदन से शीतल नौका विहार; सात दिन तक चलेगा अलौकिक उत्सव
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के भरतपुरी स्थित श्री श्री राधा मदन मोहन इस्कॉन मंदिर में इन दिनों आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति की लहरें सरोवर में तरंगित हो रही हैं। भीषण गर्मी में श्रद्धालुओं को जहां राहत की तलाश है, वहीं योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को भी जेष्ठ मास की तपती धूप से शीतलता प्रदान करने हेतु मंदिर प्रांगण में सप्त दिवसीय ‘नौका विहार उत्सव’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह उत्सव नृसिंह जयंती से आरंभ होकर पूरे सात दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन भगवान राधा-कृष्ण को भव्य नौका में विराजित कर जल विहार कराया जाएगा।
मंदिर के पीआरओ राघव पंडित दास के अनुसार, यह उत्सव जगन्नाथपुरी की दिव्य परंपराओं से प्रेरित है, जहां भगवान श्रीकृष्ण नरेंद्र सरोवर में राधा रानी संग नौका विहार करते हैं। इसी परंपरा का अनुसरण करते हुए भरतपुरी के इस्कॉन मंदिर में भी जेष्ठ मास के इस विशेष काल में चंदन यात्रा और नौका विहार उत्सव को बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। मंदिर परिसर के अंदर बने सुंदर सरोवर को विशेष रूप से सजाया गया है, जहां भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की प्रतिमाओं को शीतल चंदन का लेपन कर मनोहारी नौका में विराजित किया जाता है।
चंदन यात्रा की यह परंपरा अक्षय तृतीया से प्रारंभ होकर लगभग 21 दिन तक चलती है, जिसमें प्रतिदिन भगवान को शीतलता प्रदान करने हेतु चंदन का लेपन, पुष्पों की सजावट और मधुर भजनों के माध्यम से सेवा अर्पित की जाती है। उत्सव के दौरान भगवान की विशेष झांकी सजाई जाती है, जिसमें रजत श्रृंगार, पुष्पों की मालाएं और दीपों की रौशनी से अलौकिक दृश्य निर्मित होता है।
श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए विशेष समय निर्धारित किया गया है – प्रतिदिन संध्या 7 बजे से रात्रि 8 बजे तक, जब मंदिर परिसर भजन-कीर्तन और ‘जय राधे जय कृष्ण’ के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठता है। इस आध्यात्मिक और दिव्य आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
नौका विहार उत्सव न केवल आध्यात्मिक आनंद का स्रोत है, बल्कि यह भक्तों के लिए भी एक ध्यान, साधना और सेवा का सुंदर अवसर प्रदान करता है। राधा-कृष्ण के इस दिव्य प्रेम विहार के दर्शन मात्र से ही जनमानस की अंतरात्मा को शांति, आनंद और भक्ति का गहरा अनुभव हो रहा है।