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2008 ब्लास्ट का दोषी शफीक अंसारी उज्जैन में पैरोल पर पहुंचा, 33 जवानों की सुरक्षा में निकाह में शामिल हुआ; भाई की बेटी के निकाह में शामिल होने आया था उज्जैन!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
2008 में हुए भयावह अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में दोषी करार दिए गए आतंकवादी शफीक अंसारी इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं। आजीवन कारावास की सजा काट रहा शफीक, पैरोल पर उज्जैन पहुंचा है। इस बार वह अपने भाई की बेटी के निकाह में शामिल होने के लिए आया है। सुरक्षा के लिहाज से इस दौरे को बेहद संवेदनशील मानते हुए गुजरात और उज्जैन पुलिस ने मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार किया है। शफीक के चारों ओर 33 जवानों की फौज तैनात है, जिनमें गुजरात पुलिस के 16 और उज्जैन पुलिस के 17 जवान शामिल हैं।
रविवार रात को उज्जैन के मित्र नगर में स्थित शफीक अंसारी के घर के बाहर, सन्नाटे में भारी पुलिस बल तैनात था। मोहल्ले में सुरक्षा को लेकर दहशत और बेचैनी का माहौल बना रहा। दो एसीपी, दो टीआई, और दर्जनभर विशेष कमांडो दस्ते के जवान उसे अहमदाबाद से लेकर आए। साथ ही उज्जैन की जीवाजीगंज और चिमनगंज थाना पुलिस ने भी पूरे मोहल्ले की निगरानी अपने हाथ में ली। गुजरात पुलिस ने शफीक के घर की छत, आगे और पीछे की सुरक्षा संभाली तो वहीं स्थानीय पुलिस ने बाहर से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए रखा।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार को निकाह कार्यक्रम पूरा होते ही शफीक को फिर से गुजरात की जेल वापस ले जाया जाएगा। यह पहला मौका नहीं है जब शफीक को पैरोल मिली हो। 9 महीने पहले सितंबर 2024 में भी उसे पारिवारिक कारणों से उज्जैन लाया गया था। उस समय भी भारी पुलिस बंदोबस्त किया गया था और मोहल्ले में तनाव का माहौल बना था।
गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में 70 मिनट के भीतर 21 बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस घटना ने देशभर को हिला दिया था और इसे भारत के सबसे भयावह आतंकी हमलों में गिना जाता है। हमले की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिद्दीन नाम के आतंकी संगठन ने ली थी।
पुलिस जांच में शफीक अंसारी का नाम सामने आया और उसे कई अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया गया। 2022 में विशेष अदालत ने इस केस में फैसला सुनाते हुए 49 आरोपियों को दोषी ठहराया। इनमें से 38 को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद दी गई। शफीक भी उन्हीं दोषियों में से एक है, जिसे ताउम्र जेल में रखने का फैसला अदालत ने सुनाया था।