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गंभीर डेम खाली, खेत प्यासे: उज्जैन में जल संकट के बीच महाकालेश्वर मंदिर में की जा रही विशेष पूजा, इंद्र देव को मनाने महाकाल पहुंचे श्रद्धालु; गांव-गांव से महिलाएं पैदल चलकर महाकाल को कर रहीं जल अर्पण!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में जहां मानसून जमकर मेहरबान हो रहा है, वहीं मालवा अंचल, खासकर उज्जैन, अब भी सूखे की मार झेल रहा है। जुलाई का आधा महीना बीत चुका है, लेकिन उज्जैन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। खेतों में बोवनी अधर में लटकी है और शहर में जलसंकट गहराता जा रहा है।
उज्जैन का गंभीर डेम खाली हो चुका है, और यही वजह है कि शहरवासियों को अब एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, किसान मानसून की बेरुखी को लेकर बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं। खेतों की मिट्टी सूखी पड़ी है और उम्मीदें अब सिर्फ बादलों पर टिकी हैं।
महाकाल मंदिर में इंद्र देव को मनाने की प्रार्थना
इस बारिश के इंतजार को आध्यात्मिक दिशा देने की कोशिश उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में देखने को मिल रही है। श्रावण मास के आरंभ से ही मंदिर के पुजारी भगवान महाकाल को जल अर्पित कर इंद्र देव को प्रसन्न करने की अनुष्ठानिक परंपरा निभा रहे हैं। मंदिर के पुजारी आशीष शर्मा के मुताबिक, “हर बार जब पुजारी गर्भगृह में प्रवेश करते हैं, तो वे भगवान महाकाल को जल चढ़ाते हैं और पर्जन्य देवता के मंत्रों का जाप करते हैं, जिससे अच्छी वर्षा हो और समस्त अंचल को राहत मिले।”
गांव-गांव से महिलाएं पैदल चलकर महाकाल को कर रहीं जल अर्पण
इस सूखे और उमस भरे मौसम में ग्रामीण इलाकों की महिलाएं अपने-अपने गांवों से कलश में जल भरकर महाकाल की शरण में पहुंच रही हैं। इंदौर, देवास, आगर-मालवा और नागदा रोड के गांवों से महिलाएं डीजे, ढोल और भजन मंडलियों के साथ पदयात्रा करते हुए उज्जैन पहुंच रही हैं। श्रद्धा से भरे इन यात्रियों का उद्देश्य सिर्फ एक है—इंद्र देव को प्रसन्न कर बारिश की मांग करना।
महिलाओं के चेहरों पर उम्मीद की रेखाएं साफ देखी जा सकती हैं। कुछ ने यह भी बताया कि वे सालों से यह परंपरा निभा रही हैं और हर बार महाकाल के दरबार से उन्हें राहत की बरसात मिली है।