- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में नाग पंचमी पर विशेष आयोजन: खुलेंगे नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट, फहराया जाएगा नया ध्वज
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में नाग पंचमी के अवसर पर इस वर्ष भी भक्तों के लिए आस्था और परंपरा से जुड़ा एक ऐतिहासिक पल आने वाला है। मंगलवार, 29 जुलाई 2025 को, मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे जिनमें मुख्य रूप से भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन और मंदिर शिखर पर ध्वज फहराने की रस्म शामिल है।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, नाग पंचमी के दिन हर वर्ष की तरह इस बार भी श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा द्वारा मंदिर के मुख्य शिखर पर शासकीय पूजन के बाद नया ध्वज फहराया जाएगा। यह विशेष परंपरा सिर्फ चार प्रमुख पर्वों—विजयादशमी, महाशिवरात्रि, गुरु पूर्णिमा और नाग पंचमी—पर निभाई जाती है। शेष दिनों में ध्वज चढ़ाने की अनुमति मंदिर समिति के माध्यम से श्रद्धालुओं को दी जाती है, जो पूर्व बुकिंग के आधार पर होती है।
इस आयोजन का एक और विशेष आकर्षण है—महाकाल मंदिर के तीसरे खंड में स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर के पट। ये पट वर्ष में केवल एक बार, नाग पंचमी पर खोले जाते हैं। मंदिर प्रशासन ने बताया कि सोमवार रात 12 बजे से पट खोल दिए जाएंगे और दर्शन का क्रम मंगलवार देर रात तक चलता रहेगा। इस दुर्लभ दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुँचते हैं, और प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा को लेकर मुकम्मल तैयारियाँ पूरी कर ली हैं।
महाकाल मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका त्रिस्तरीय स्वरूप है। गर्भगृह में भगवान महाकालेश्वर के रूप में शिव विराजमान हैं, जबकि प्रथम खंड के ऊपर भगवान औंकारेश्वर, और तीसरे खंड में भगवान नागचंद्रेश्वर की आराधना होती है। नागचंद्रेश्वर मंदिर में विराजमान प्रतिमा अत्यंत अद्वितीय है—इसमें भगवान शिव नाग के फन तले माता पार्वती, कार्तिकेय, गणेश, वाहन नंदी और सिंह के साथ एक ही शिला पर अंकित हैं। यह मूर्ति देश की उन गिनी-चुनी दुर्लभ स्थापत्य कृतियों में से एक मानी जाती है, जिसे देखने का अवसर सिर्फ साल में एक बार ही मिलता है।
श्रद्धालुजन इस दिन को विशेष पुण्यदायी मानते हैं, और मान्यता है कि भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने से परिवार में सुख-समृद्धि और रोगों से मुक्ति मिलती है।