- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा अब बनी हकीकत: अब ‘सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय’ कहलाएगा विक्रम विश्वविद्यालय, विधानसभा में विधेयक पारित!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के लिए यह पल ऐतिहासिक है—विक्रम विश्वविद्यालय अब “सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय” के नाम से पहचाना जाएगा। वर्षों से यह मांग उठती रही थी कि इस प्राचीन नगरी की गौरवशाली पहचान, सम्राट विक्रमादित्य के नाम को विश्वविद्यालय से जोड़ा जाए। अब वह प्रतीक्षित सपना साकार हो गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस परिवर्तन की घोषणा 30 मार्च 2025 को विक्रम विश्वविद्यालय के 29वें दीक्षांत समारोह के दौरान की थी। इसके तुरंत बाद विश्वविद्यालय की आपात बैठक कुलपति प्रो. अर्पण भारद्वाज की अध्यक्षता में बुलाई गई, जहां कार्यपरिषद सदस्य राजेश सिंह कुशवाह की पहल पर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित हुआ और उसे राज्य शासन को भेजा गया।
इस प्रस्ताव को 4 अगस्त को विधानसभा में विधेयक के रूप में पारित किया गया। जैसे ही राज्यपाल की मंजूरी मिलेगी, विश्वविद्यालय के सभी दस्तावेज, नामपट्ट, प्रमाण पत्र और सरकारी अभिलेखों में इसे “सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय” के नाम से दर्ज किया जाएगा।
इस नाम परिवर्तन को केवल प्रतीकात्मक न मानें—यह उज्जैन की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और शैक्षणिक विरासत को और मजबूती देता है। सम्राट विक्रमादित्य न केवल अवंतिका के स्वर्ण युग के प्रतीक रहे हैं, बल्कि न्याय, ज्ञान और परंपरा के प्रतीक पुरुष भी माने जाते हैं।
विक्रम विश्वविद्यालय की स्थापना 1 मार्च 1957 को हुई थी, जिसकी आधारशिला 23 अक्टूबर 1956 को तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने रखी थी। उस ऐतिहासिक दिन की अध्यक्षता मध्यभारत के तत्कालीन राजप्रमुख जीवाजीराव सिंधिया ने की थी।
आज, जब विश्वविद्यालय का नाम भारत के महानतम सम्राटों में एक के नाम पर रखा जा रहा है, यह न केवल उज्जैन बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने इस ऐतिहासिक फैसले पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताया है।