- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
उज्जैन में जन्माष्टमी: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीरा माधव मंदिर और सांदीपनि आश्रम में किया सपत्नीक पूजन, कृष्ण भजनों में हुए भावविभोर; पूरे प्रदेश में जन्माष्टमी पर हुए भव्य आयोजन!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार बेहद धूमधाम और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। प्रदेशभर के हजारों मंदिरों की तरह ही उज्जैन, जो भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली और महाकाल की नगरी है, वहां भी धार्मिक उल्लास का नजारा देखने को मिला। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सपत्नीक पूजा-अर्चना की और विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होकर भक्तिमय माहौल को और भी जीवंत बना दिया।
मीरा माधव मंदिर में सपत्नीक पूजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार तड़के उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध मीरा माधव मंदिर पहुंचे। यहाँ उन्होंने पत्नी संग भगवान श्रीकृष्ण और देवी मीरा की आराधना की। मुख्यमंत्री ने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और सर्वांगीण विकास की कामना की। इस अवसर पर विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति कलावती यादव सहित जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
डॉ. यादव ने मंदिर में उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखकर विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। विशेषकर मक्सी रोड और आसपास के क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास की योजना बनाई गई है।
सांदीपनि आश्रम में भजनों में खोए मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. यादव अपने परिवार संग महर्षि सांदीपनि आश्रम भी पहुंचे, जिसे श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली माना जाता है। यहाँ उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और गुरु सांदीपनि की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।
आश्रम में आयोजित भव्य जन्माष्टमी उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं भी भक्तिरस में डूब गए और मंच से “श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी” भजन गाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा –
“यही वह पवित्र स्थान है जहाँ बालक कृष्ण मनुष्य से योगेश्वर श्रीकृष्ण बने। द्वारका, वृंदावन और गोकुल जितने ही पवित्र और महत्वपूर्ण ये स्थल भी हैं।”
डॉ. यादव ने भगवान शिव मंदिर और बैकुंठ धाम जाकर भी दर्शन किए और प्रदेश की समृद्धि और नागरिकों की मंगलकामना की।
पूरे प्रदेश में जन्माष्टमी का भव्य आयोजन
मुख्यमंत्री ने केवल उज्जैन ही नहीं बल्कि रायसेन, भोपाल, धार और इंदौर जिले के जन्माष्टमी कार्यक्रमों में भी भाग लिया। हर जगह उन्होंने श्रद्धालुओं से संवाद किया और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की।
संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेशभर के 3000 मंदिरों में विशेष सजावट और प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें सर्वश्रेष्ठ सजावट करने वाले मंदिर को 1.5 लाख और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 1 लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई।
उज्जैन में सजी भक्ति की रंगोली
उज्जैन के प्रमुख मंदिरों – गोपाल मंदिर, इस्कॉन मंदिर, श्रीकृष्ण मित्रवृंदा मंदिर और सांदीपनि आश्रम – को विशेष सजावट से अलंकृत किया गया। इन मंदिरों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भजन-कीर्तन और नाट्य मंचनों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावपूर्ण प्रदर्शन हुआ।
सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों में भी श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों पर संवाद, प्रतियोगिताएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। सांदीपनि आश्रम में कलाकारों द्वारा श्रीकृष्ण जन्म का नाट्य मंचन किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मुख्यमंत्री ने मंच पर आकर कलाकारों को माल्यार्पण कर सम्मानित किया।