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उज्जैन हादसा: 68 घंटे बाद मिली कॉन्स्टेबल आरती पाल की बॉडी, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; मां बोली – “आरती हमारी बेटी नहीं, बेटा थी”!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में शिप्रा नदी में कार गिरने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। 6 सितंबर की रात तीन पुलिसकर्मियों की कार नदी में जा गिरी थी। चार दिनों तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद मंगलवार को तीसरे पुलिसकर्मी, कॉन्स्टेबल आरती पाल का शव भी बरामद कर लिया गया।
हादसे में तीन पुलिसकर्मियों की मौत
इस हादसे में उन्हेल थाना प्रभारी अशोक शर्मा, एसआई मदनलाल निनामा और कॉन्स्टेबल आरती पाल कार में सवार थे।
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अशोक शर्मा का शव रविवार को बरामद किया गया।
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एसआई मदनलाल निनामा का शव सोमवार को घटनास्थल से 3 किलोमीटर दूर मिला।
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वहीं, कॉन्स्टेबल आरती पाल की बॉडी 68 घंटे बाद मंगलवार को घटनास्थल से महज 70 मीटर की दूरी पर मिली।
यह उज्जैन का अब तक का सबसे बड़ा रेस्क्यू अभियान माना जा रहा है। NDRF, SDRF, पुलिस, होमगार्ड और माँ शिप्रा तैराक दल के करीब 130 सदस्य लगातार दिन-रात जुटे रहे।
आरती पाल: परिवार की इकलौती बहन और पुलिस विभाग की समर्पित कर्मी
40 वर्षीय आरती पाल रतलाम की रहने वाली थीं। वे सात भाइयों में इकलौती बहन थीं और परिवार के लिए बेटा-बेटी दोनों की जिम्मेदारी निभाती थीं। परिजनों ने बताया कि आरती 4 सितंबर को अपने भाई जितेंद्र पाल की सवा माह की रस्म में शामिल होने घर आई थीं। परिवार के साथ धूप-ध्यान की रस्म के बाद बैठते हुए उन्होंने नवमी के दिन दादाजी के श्राद्ध में आने का भी वादा किया था। लेकिन ड्यूटी पर लौटने के बाद यह हादसा हो गया।
मां शीला पाल ने कहा – “आरती हमारी बेटी नहीं, बेटा थी। हमेशा मुस्कुराती रहती थी और परिवार की ढाल बनी रहती थी।”
आरती ने 2012 में पुलिस विभाग जॉइन किया था। पहली पोस्टिंग महाकाल थाना में हुई और पिछले 4 साल से उन्हेल थाने में तैनात थीं। वे अविवाहित थीं और पूरी तरह नौकरी व परिवार के लिए समर्पित रहीं।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
बुधवार को उज्जैन के चक्र तीर्थ पर आरती पाल का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके छोटे भाई लोकेंद्र पाल ने मुखाग्नि दी। इस दौरान एडीजी उमेश जोग, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा और कलेक्टर रोशन सिंह सहित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार शोकाकुल परिवार के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि अगर परिवार अनुकंपा नियुक्ति की मांग करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
यह रेस्क्यू ऑपरेशन उज्जैन जिले का अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान माना जा रहा है। लगातार चार दिन तक अभियान चला और नदी से शव निकालने में टीमों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
शिप्रा नदी में पहले भी हादसे हो चुके हैं—
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जनवरी 2024 में मंगलनाथ मंदिर के पास कार नदी में गिरी थी, लेकिन सभी यात्री सुरक्षित निकाल लिए गए थे।
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2022 में मारुति वैन ब्रिज से गिरी थी, जिसमें ड्राइवर की मौत हो गई थी।
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2007 में महिदपुर में स्कूली बस नदी में गिरी थी, जिसमें छह बच्चों और एक शिक्षिका की जान गई थी।
लेकिन इस बार लगातार 68 घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान ने इसे उज्जैन के इतिहास का सबसे कठिन और लंबा बचाव अभियान बना दिया।