- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
सिंहस्थ 2028: उज्जैन में बनेगी स्थायी कुंभ नगरी, वैष्णव अखाड़ों का सरकार को समर्थन; किसान अब भी विरोध में, अखाड़ों की मांग: हरिद्वार की तर्ज पर हो विकास!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में 2028 सिंहस्थ कुंभ मेले को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने स्थायी कुंभ नगरी विकसित करने की तैयारी तेज कर दी है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना लगभग 2,378 हेक्टेयर क्षेत्र में फैलेगी और इस पर करीब 5,000 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत चौड़ी सड़कें, भूमिगत बिजली व्यवस्था, पेयजल, सीवरेज, स्कूल, अस्पताल और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
किसानों का विरोध और संतों का समर्थन
लैंड पुलिंग योजना के तहत किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। यही वजह है कि किसान इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। वहीं, साधु-संतों ने सरकार की इस योजना का समर्थन किया है। संतों का कहना है कि सिंहस्थ मेला क्षेत्र को स्थायी स्वरूप देना समय की मांग है, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके।
तीनों प्रमुख वैष्णव अखाड़ों – अखिल भारतीय श्री पंच रामानंदी दिगंबर आणि अखाड़ा, श्री पंच रामानंदी निर्वाणी आणि अखाड़ा और श्री पंच रामानंदी निर्मोही आणि अखाड़ा – ने सरकार के पक्ष में समर्थन पत्र जारी किया है। इस पत्र पर रामादल अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज, महंत रामचंद दास महाराज, महंत दिग्विजय दास महाराज और महंत चरणदास महाराज के हस्ताक्षर हैं।
अखाड़ों की मांग: हरिद्वार की तर्ज पर हो विकास
अखाड़ों ने कलेक्टर और सिंहस्थ मेला अधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि सिंहस्थ 2016 में आए आंधी-तूफान ने मेला क्षेत्र को अस्त-व्यस्त कर दिया था, इसलिए अब 2028 के मेले के लिए स्थायी इंतजाम जरूरी हैं। संतों ने मांग की है कि हरिद्वार की तरह उज्जैन मेला क्षेत्र में स्थायी सड़कें, सीवरेज, बिजली और पेयजल की व्यवस्था की जाए।
उनका कहना है कि स्थायी ढांचे के विकसित होने से न केवल सिंहस्थ के दौरान सुविधा मिलेगी, बल्कि सालभर अखाड़ों, आश्रमों, मठों और मंदिरों में श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहेगा।
इस बीच, किसान संगठनों का विरोध और तेज हो गया है। मप्र किसान कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने किसान संघ पर आरोप लगाते हुए कहा कि किसान संघ भाजपा की “बी पार्टी” है और केवल दिखावे का आंदोलन कर रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जब किसानों के हक में आवाज उठाई, तभी किसान संघ सामने आया, वरना अब तक वह चुप था।
वहीं, किसान संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। उनका कहना है कि अगर किसान संघ भाजपा का समर्थक होता, तो सरकार को लैंड पुलिंग लागू करने की चुनौती नहीं देता। उन्होंने दावा किया कि किसान संघ न केवल लैंड पुलिंग बल्कि प्रदेश में खाद, बीज और अन्य कृषि समस्याओं को लेकर भी लगातार ज्ञापन देता रहा है।
एक ओर जहां किसान अपनी जमीन के बदले लैंड पुलिंग का विरोध कर रहे हैं, वहीं साधु-संत सरकार के साथ खड़े हैं और स्थायी कुंभ नगरी की वकालत कर रहे हैं। आने वाले समय में सिंहस्थ 2028 को लेकर यह टकराव और गहराने की संभावना है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार किसानों की नाराजगी दूर करते हुए साधु-संतों के समर्थन को किस तरह संतुलित करती है।