- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
संगीन अपराधी भी हैं माँ के भक्त: उज्जैन जेल में 682 कैदी उपवास और गरबा के जरिए सुधार की राह पर, रोजाना डेढ़ घंटे तक करते है गरबा; मां दुर्गा से मांग रहे गुनाहों की माफी!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
नवरात्रि के मौके पर जहां बाहर गरबा पंडालों में रंगीनियां और भक्ति का माहौल है, वहीं उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में भी कैदी पूरे श्रद्धाभाव से माता की आराधना में जुटे हैं। हत्या, लूट और बलात्कार जैसे संगीन अपराधों में बंद कैदी भी इन दिनों उपवास रख रहे हैं और गरबा खेलते हुए मां दुर्गा से अपने गुनाहों की माफी मांग रहे हैं।
रोजाना डेढ़ घंटे तक गरबा
जेल प्रशासन की ओर से बैरकों में माता की प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा को फूलों से सजाया गया है और हर शाम ठीक 6 बजे आरती होती है। इसके बाद कैदी शाम 7:30 बजे तक गरबा खेलते हैं। खास बात यह है कि इस आयोजन में हर उम्र और हर बैरक के कैदी शामिल होते हैं। सभी कैदी सफेद कपड़े और सफेद टोपी पहनकर एकरूपता और अनुशासन का संदेश देते हैं।
कैदियों का खुद का लाइव म्यूजिक बैंड
गरबा का माहौल और भी खास इसलिए है क्योंकि इसके लिए जेल के अंदर ही एक लाइव म्यूजिक बैंड तैयार किया गया है। इसमें कैदी खुद ड्रम, ढोलक, सिंथेसाइज़र और ऑक्टोपैड बजाते हैं। भजन गाए जाते हैं और फिर कैदी संगीत की धुनों पर गरबा करते हैं। जेल अधीक्षक मनोज साहू का कहना है कि यह परंपरा पिछले साल शुरू हुई थी और अब हर साल नवरात्रि में इसे आयोजित किया जाता है।
उपवास पर हैं 682 कैदी
भैरवगढ़ जेल में इस समय करीब 2100 कैदी बंद हैं, जिनमें से 682 कैदियों ने नवरात्रि का व्रत रखा है। इनमें पुरुष और महिला दोनों शामिल हैं। कुछ कैदी सिर्फ जल ग्रहण कर रहे हैं, जबकि कुछ फलाहार पर टिके हैं। जेल प्रशासन उन्हें नियमित रूप से फल और फलाहार उपलब्ध करवा रहा है।
जेल अधीक्षक ने बताया कि कई कुख्यात अपराधी भी नवरात्रि में व्रत रखते हैं। उनका मानना है कि यह भक्ति उन्हें गुनाहों की माफी दिलाएगी और जीवन की नई शुरुआत का रास्ता खोलेगी। बहुत से कैदी अब समाज की मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जता रहे हैं।