- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
उज्जैन प्रशासन एक्शन मोड में: किसानों को भावांतर योजना का लाभ दिलाने के लिए बने 147 पंजीयन केंद्र, 17 अक्टूबर तक कर सकेंगे फ्री रजिस्ट्रेशन; कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
किसानों को राहत और बेहतर दाम दिलाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी भावांतर भुगतान योजना को जिले में ज़्यादा से ज़्यादा किसानों तक पहुँचाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज़ कर दी हैं। शनिवार दोपहर उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने प्रशासनिक संकुल भवन के सभाकक्ष में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। बैठक में तय किया गया कि जिले में योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा ताकि कोई भी किसान इस योजना से वंचित न रहे।
बैठक में सांसद अनिल फिरोजिया, जिला पंचायत अध्यक्ष कमला कुंवर देवड़ा, उपाध्यक्ष शिवानी कुंवर, नगर निगम सभापति कलावती यादव, जनप्रतिनिधि संजय अग्रवाल, राजेश धाकड़, अपर कलेक्टर शाश्वत शर्मा और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
किसानों के लिए 147 पंजीयन केंद्र बनाए गए
कलेक्टर ने बताया कि जिले में किसानों की सोयाबीन फसल के पंजीयन के लिए प्राथमिक सहकारी समितियों के स्तर पर 147 पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं। किसान ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर तक अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीयन पूरी तरह निःशुल्क है और यह सहकारी समितियों, तहसील कार्यालयों, जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों में बनाए गए सुविधा केंद्रों पर किया जा रहा है।
सांसद बोले – योजना का लाभ हर किसान तक पहुँचे
बैठक में सांसद अनिल फिरोजिया ने अधिकारियों से कहा कि भावांतर योजना को लेकर गांव-गांव तक प्रचार किया जाए ताकि जिले के हर किसान को इसका लाभ मिले। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष से आग्रह किया कि जिला पंचायत में विशेष बैठक आयोजित कर जनप्रतिनिधियों को योजना की जानकारी दी जाए ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को जागरूक कर सकें।
किसानों की सुविधा के लिए बनेगा कंट्रोल रूम
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों की समस्या सुनने और जानकारी देने के लिए एक कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए। इसके साथ ही मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप हेल्पलाइन जारी की जाएगी, जिससे किसान सीधे प्रशासन से संपर्क कर सकें।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि किसानों को यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि भावांतर योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो अपनी सोयाबीन की बिक्री मंडी में करेंगे।
गांव-गांव तक पहुंचेगी जानकारी
प्रशासन अब इस योजना को जन-जन तक पहुँचाने के लिए नई रणनीति अपना रहा है। जिले में चलने वाले वाहनों पर दोनों तरफ भावांतर योजना की जानकारी वाले फ्लेक्स और बैनर लगाए जाएंगे। साथ ही वीडियो क्लिप्स चलाकर किसानों को जागरूक किया जाएगा ताकि वे समझ सकें कि योजना में पंजीयन और लाभ कैसे मिलेगा।
सशुल्क पंजीयन की सुविधा भी उपलब्ध
जो किसान निजी माध्यम से पंजीयन कराना चाहते हैं, वे लोकसेवा केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), निजी साइबर कैफे या MP किसान ऐप के ज़रिए भी पंजीयन करा सकते हैं। इसके लिए अधिकतम शुल्क ₹50 निर्धारित किया गया है।
सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों का पंजीयन केवल सहकारी समितियों के माध्यम से ही किया जाएगा।
पंजीयन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ होंगे –
-
खसरा बी-1 की नकल
-
आधार कार्ड
-
बैंक पासबुक
-
समग्र आईडी की कॉपी
-
आधार लिंक मोबाइल नंबर
24 अक्टूबर से शुरू होगी विक्रय अवधि
बैठक में बताया गया कि पंजीकृत किसान अपनी सोयाबीन फसल 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच कृषि उपज मंडी में बेच सकेंगे। सरकार द्वारा किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और मॉडल रेट/विक्रय मूल्य के बीच का अंतर डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से दिया जाएगा।
उदाहरण के लिए, यदि
-
MSP ₹5328 प्रति क्विंटल है,
-
मॉडल रेट ₹4600 है,
-
और किसान ने ₹4500 प्रति क्विंटल में बिक्री की,
तो सरकार किसान को ₹728 प्रति क्विंटल का भावांतर भुगतान करेगी।
किसानों के हित में बड़ा कदम
कलेक्टर सिंह ने कहा कि भावांतर योजना किसानों को न्यायपूर्ण मूल्य दिलाने और आर्थिक सुरक्षा देने के लिए एक मजबूत कदम है। प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी किसान जानकारी के अभाव में योजना से वंचित न रहे।