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उज्जैन में ‘प्रेत-निकासी’ के नाम पर महिला के साथ क्रूरता: महिला को जंजीरों से पीटा और सिर पर गर्म सिक्का चिपकाया, पुलिस ने 8 आरोपियों पर केस दर्ज किया
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां इलाज और “शरीर से प्रेत आत्मा निकालने” के नाम पर एक महिला के साथ क्रूरता की गई। महिला की दोनों हथेलियों और सिर पर गर्म सिक्के लगाकर उसे गंभीर रूप से जला दिया गया। दर्द और यातना के कारण पीड़िता बेहोश हो गई थी।
यह घटना 29 सितंबर की है, लेकिन पीड़िता ने 10 दिन बाद गुरुवार (9 अक्टूबर) को उज्जैन महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें पीड़िता के परिवार के सदस्य भी शामिल हैं।
पीड़िता उर्मिला (22 वर्ष) उज्जैन के जूना सोमवारिया की रहने वाली है। उसकी शादी गौतमपुरा में हुई थी और फिलहाल वह अपनी दो वर्षीय बेटी के साथ उज्जैन स्थित अपने घर में रह रही थी। लंबे समय से बीमार चल रही उर्मिला को कई बार डॉक्टर दिखाया गया, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला।
इसके बाद उसकी मां को पता चला कि खाचरोद के पास स्थित श्रीवच्छ गांव में एक महिला “शरीर में माता का आगमन” कर पवित्र उपाय करती है, जिससे बुरी आत्मा निकल जाती है और बीमारी ठीक हो जाती है। नवरात्रि के अवसर पर माता के आशीर्वाद के लिए उर्मिला को वहां ले जाने का निर्णय लिया गया।
नवरात्रि की सप्तमी (29 सितंबर) को उर्मिला अपनी मां हंसा और परिवार के दो अन्य लोगों के साथ श्रीवच्छ गांव पहुँची। वहां महिला सुधा बाई, उसके बेटे कान्हा, मनोहर भील, कान्हा भील, संतोष चौधरी, राजू चौधरी, कान्हा चौधरी और रितेश चौधरी ने उर्मिला को अकेले कमरे में ले जाकर जंजीरों से पीटा और फिर दोनों हथेलियों पर रुई की बत्ती को घी में भिगोकर जलाया।
इतना ही नहीं, उसके सिर पर गर्म सिक्का चिपकाया गया, जिससे सिर की त्वचा जलकर उतर गई। इस क्रूर यातना के चलते उर्मिला बेहोश हो गई थी।
10 दिन बाद दर्ज कराई गई शिकायत
पीड़िता ने घटना के 10 दिन बाद उज्जैन महिला थाना पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस निरीक्षक (TI) लीला सोलंकी ने बताया कि महिला के हाथ और सिर के जलने के गंभीर निशान देखे गए। इस पर खाचरोद थाना को सूचित किया गया। जांच में यह सामने आया कि सुधा बाई इस तरह का पूजन और टोटका करती है।
इस मामले में 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इनमें सुधा बाई, उसके बेटे कान्हा, मनोहर भील, कान्हा भील, संतोष चौधरी, राजू चौधरी, कान्हा चौधरी और रितेश चौधरी शामिल हैं। इनमें से चार आरोपी पीड़िता के परिवार के सदस्य हैं।
उर्मिला ने पुलिस को बताया कि वह पति से अलग अपनी मां के साथ रहती है और अगरबत्ती बनाने का काम करके अपना और अपनी बेटी का गुजारा चलाती है। वह कई बार बीमार पड़ चुकी थी और इलाज के बावजूद ठीक नहीं हुई। इसी कारण उसने नवरात्रि में मां के पास जाकर पूजा पाठ करने का निर्णय लिया।
पुलिस निरीक्षक लीला सोलंकी ने बताया कि मामले में तीन आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। पीड़िता के दोनों हाथों पर जले हुए गहरे घाव हैं और घटना के 10 दिन बाद भी छाले बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के मामलों में “धार्मिक आडंबर” के नाम पर होने वाली हिंसा गंभीर अपराध है और इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।