- सप्तसागर विकास को गति देने के निर्देश: निगम आयुक्त ने चार प्रमुख जलाशयों का किया निरीक्षण, गहरीकरण-सौंदर्यीकरण पर जोर
- महाकाल मंदिर परिसर के पास खुदाई में मिला शिवलिंग: निर्माण कार्य रोका गया, दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
- भोर में खुले महाकाल के पट: जल और पंचामृत से अभिषेक, रजत आभूषणों में सजे बाबा
- 8 साल बाद जेष्ठ में अधिकमास का दुर्लभ संयोग: 17 मई से 15 जून तक रहेंगे मांगलिक कार्य बंद, धार्मिक साधना, दान-पुण्य और तीर्थ के लिए श्रेष्ठ समय
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: स्वस्ति वाचन के बाद खुले पट, पंचामृत से अभिषेक; शेषनाग मुकुट में दिए भगवान ने दर्शन
सप्तसागर विकास को गति देने के निर्देश: निगम आयुक्त ने चार प्रमुख जलाशयों का किया निरीक्षण, गहरीकरण-सौंदर्यीकरण पर जोर
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में प्राचीन जल संरचनाओं के संरक्षण और सौंदर्य संवर्धन के लिए चल रहे सप्तसागर विकास कार्य को लेकर नगर निगम ने गतिविधियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप धार्मिक नगरी में इन ऐतिहासिक जलाशयों को उनके मूल स्वरूप के करीब लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को निगम आयुक्त श्री अभिलाष मिश्रा ने शहर के चार प्रमुख जलाशयों—गोवर्धन सागर, ऋषि तलाई, पुरुषोत्तम सागर और क्षीरसागर—का दौरा कर प्रगति का जायजा लिया।
गोवर्धन सागर: 8.47 करोड़ के विकास कार्य, बारिश से पहले पूरा करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान गोवर्धन सागर में प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी दी गई, जिनकी कुल लागत 8.47 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के तहत जल गुणवत्ता सुधार, बाउंड्रीवॉल निर्माण, ग्रीन एरिया डेवलपमेंट, लैंडस्कैपिंग और पौधारोपण जैसे कार्य शामिल हैं।
आयुक्त ने संबंधित ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समयसीमा में, विशेष रूप से बारिश से पहले, गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं। साथ ही जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत अस्थायी अतिक्रमण हटाकर सफाई और भूमि समतलीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
ऋषि तलाई: गहरीकरण और गाद निकासी पर फोकस
कोटा क्षेत्र स्थित ऋषि तलाई में चल रहे कार्यों का निरीक्षण करते हुए आयुक्त ने गहरीकरण और गाद निकालने की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को गति देकर जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
इसके साथ ही जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बड़े पैमाने पर पौधारोपण सुनिश्चित करने की बात भी कही गई, ताकि जलाशय का पर्यावरणीय संतुलन बेहतर हो सके।
पुरुषोत्तम सागर: श्रमदान के साथ जनभागीदारी पर जोर
पुरुषोत्तम सागर पर निरीक्षण के दौरान निगम आयुक्त स्वयं श्रमदान में शामिल हुए। इस दौरान क्षेत्रीय पार्षद श्री दिलीप परमार और स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे।
आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जल गंगा संवर्धन अभियान और अमृत 2.0 योजना के तहत यहां सौंदर्यीकरण कार्य किए जाएं। इसमें आकर्षक विद्युत पोल, पाथवे और बाउंड्रीवॉल निर्माण शामिल हैं।
उन्होंने विशेष रूप से अधिकमास को ध्यान में रखते हुए पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए साफ-सफाई और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर बल दिया।
क्षीरसागर: आधुनिक तकनीक से जल गुणवत्ता में सुधार
वार्ड 24 स्थित क्षीरसागर कुंड का निरीक्षण जोन अध्यक्ष श्री सुशील श्रीवास के साथ किया गया। यहां नैनो डिफ्यूजर सॉफ्ट एरेटर तकनीक के माध्यम से जल गुणवत्ता सुधार का कार्य जारी है। इस तकनीक से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने के कारण उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
नगर निगम द्वारा यहां आकर्षक विद्युत फाउंटेन, पेंटिंग और स्वच्छता संदेशों से जुड़ा कार्य भी कराया गया है। आयुक्त ने जोनल अधिकारी को निर्देश दिए कि ग्रीन एरिया का विकास, दीवारों का संधारण और नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अधिकमास से जुड़ी तैयारियां तेज
आगामी अधिकमास के दौरान सप्तसागर में पूजन और धार्मिक गतिविधियों का विशेष महत्व रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन इन जलाशयों को व्यवस्थित और स्वच्छ बनाने में जुटा है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और इन प्राचीन स्थलों की गरिमा बनी रहे।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री वैभव भावसार, भवन अधिकारी श्री राजकुमार राठौर, जोनल अधिकारी श्याम सुंदर शर्मा, श्री सुनील जैन और श्री जितेंद्र श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
सप्तसागर विकास के इन प्रयासों को शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सहेजने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जहां परंपरा और आधुनिक विकास कार्यों का संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है।