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विधायक प्रतिनिधि की गाड़ी पर हूटर, जवाब दिया- सभी लगाते हैं
उज्जैन | सरकार के निर्देश पर वाहनों से लाल, पीली और नीली बत्तियां तो हटा ली गई हैं लेकिन ऐसे वाहनों में सफर करने वाले अब भी वीआईपी के भ्रम से बाहर नहीं आए हैं। बत्ती के बाद अब वे हूटर को प्रतिष्ठा और रौब से जोड़कर देख रहे हैं।
अधिनियम नहीं देता अनुमति
केंद्रीय मोटर यान नियम 1989 में लिखा है कि ऐसा बहुस्तर हॉर्न नहीं लगाया जाएगा जिससे विभिन्न प्रकार की ध्वनि निकलती हो या कर्कश, कंपित, तेज या ज्यादा शोर उत्पन्न होने वाली कोई दूसरी युक्ति लगी हो।
इनको छोड़ हूटर लगाया तो पांच हजार तक जुर्माना
एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, आरटीओ, डायल 100 वाहनों पर हूटर लगाए जा सकते हैं। आरटीओ के अनुसार शेष किसी भी वाहन पर हूटर नहीं लगाया जा सकता है। हूटर लगाए जाने पर पांच हजार रुपए तक जुर्माना किया जा सकता है।
अधिकारियों एवं वीआईपी के वाहनों से लाल, पीली व नीली बत्ती हटाने की अधिसूचना के बाद आरटीओ ने ऐसे सभी वाहनों के उपयोगकर्ताओं को लील, पीली व नीली बत्ती के उपयोग अनुमति पत्र आरटीओ में तत्काल जमा कराने के आदेश दिए हैं। आरटीओ मनोज तेहनगुरिया ने बताया केंद्रीय मोटर यान नियम 1989 के नियम 108 के उपनियम 2 एवं 3 का लोप किया गया है जिसके परिणाम स्वरूप अधिकारियों एवं वीआईपी को राज्य सरकार द्वारा दी गई लाल, पीली एवं नीली नंबर लाइट लगाने के अधिकार निष्प्रभावी हो गए हैं।
लाल, पीली, नीली बत्ती के अनुमति पत्र तत्काल आरटीओ में जमा कराएं
इधर गाड़ी पर नंबर नहीं लिखे
लेकिन हूटर लगा लिया
कलेक्टोरेट के सामने खड़े इस वाहन में भले ही नंबर न डाले गए हों लेकिन उसके मालिक ने उस पर हूटर लगा रखे हैं। इससे उनके रौब या वीआईपी होने का पता चलता है। अब उन्हें कौन बताए कि हूटर क्यों लगाए जाते हैं।
वाहन की नंबर प्लेट पर लिखा है
विधायक प्रतिनिधि, ऊपर हूटर
कोर्ट परिसर में खड़े इस वाहन की नंबर प्लेट पर विधायक प्रतिनिधि लिखा है। ऊपर दो हूटर लगे हैं। वाहन मालिक शंकर अहिरवार से पूछा- हूटर क्यों लगवाया है तो बोले-सभी लगवाते हैं इसलिए लगाया। बाद में कहा-सरकार या संगठन के आदेश पर उसे हटा देंगे।