- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
43/84 श्री अंगारेश्वर महादेव
43/84 श्री अंगारेश्वर महादेव
पहले कल्प में लाल शरीर की शोभावाला टेढा शरीर वाला क्रोध से युक्त एक बालक शिव जी के शरीर से उत्पन्न हुआ। इसे शिवजी ने धरती पर रख दिया। उसका नाम भूमिपुत्र हुआ। जन्म से ही उसका शरीर भयावह रहा। जब वह धरती पर चलने लगा तो धरती कांपने लगी, समुद्रो में तुफान आने लगा। यह सब देखकर देवताओं ओर मनुष्यों में चिंता होने लगी ओर वे देवगुरू बृहस्पति के पास गए। उन्होने कहा कि बालक भगवान शंकर के शरीर से उत्पन्न हुआ है ओर उत्पन्न होते ही उत्पात मचा दिया है। यह सब सुनकर देवगुरू देवताओं को लेकर कैलाश पर्वत गए ओर भगवान को त्रासदी के बारे में बताया। यह सुन भगवान ने बालक को अपने पास बुलाया। बालक ने आकर शिवजी से पूछा हे प्रभु मेरे लिए क्या आज्ञा है। मै क्या करू। तब भगवान ने कहा बालक तुम्हारा नाम अंगारक रखा है। तुम्हे पृथ्वी पर लोगो के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए बजाए विनाश के। यह वचन सुनकर बालक उदास हो गया। तब भगवान ने अपनी गोद में बैठाकर समझाया। हे पुत्र मैं तुम्हे उज्जैन नगरी में उत्तम स्थान देता हूं। महाकाल वन में खगर्ता व शिप्रा का संगम है। शिव ने कहा मैने जब गंगा को मस्तक पर धारण किया था। उस समय वह गुस्से से चंद्र मंडल से नीचे गिरी थी। आकाश से नीचे आने पर उसका नाम खगर्ता हुआ। इसलिए मैने वहां अवतार लिया है। मै तुम्हें तीसरा स्थान देता हू। तुम वहां जाकर रहो इससे तीनो लोको में तुम्हें जाना जाएगा ओर तुम्हारी तृप्ति भी होगी। लोग तुम्हारी प्रसन्नता के लिए चतुर्थी का व्रत करेगे, पूजन करेगे ओर दक्षिणा देगें। इससे तुम्हे भोजन की तृप्ति होगी। तब बालक यहां पर आया। इसके बाद से ही इनके दर्शन से भक्तों को सर्वसंपदा प्राप्त होती है।