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शाही सवारी में सात स्वरूपों में हुए महाकालेश्वर के दर्शन, पांच लाख श्रद्धालु जुटे
उज्जैन | श्रावण-भादौ की शाही सवारी में सोमवार को भगवान महाकालेश्वर के सात स्वरूपों में दर्शन हुए। पालकी में चंद्रमौलेश्वर विराजमान थे और अन्य छह झांकियों में मनमहेश, शिव तांडव, उमा-महेश, घटाटोप, सप्तधान्य व होल्कर मुघौटे थे। सोमवती अमावस्या के संयोग के कारण सवारी में दोगुना भीड़ जुटी। कलेक्टर संकेत भोंडवे के अनुसार पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पालकी में विराजे महाकाल के दर्शन किए। महाकाल मंदिर से शाम 4 बजे रवाना हुई पालकी आधा घंटा देरी से शाम 5.45 बजे रामघाट पहुंची। पूरे सवारी मार्ग पर बाबा महाकाल का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया और आरती उतारी।
पालकी के बाद बिगड़ा सवारी का स्वरूप, पुलिस ने दिए धक्के
ढाबारोड सत्यनारायण मंदिर के पास शाम 7.15 बजे पालकी के आते ही अव्यवस्थाएं हो गईं। सवारी का अगला हिस्सा निकलने तक लोग जमे रहे लेकिन पालकी निकलने के बाद धक्का-मुक्की शुरू हो गई। भीड़ को काबू करने के सारे प्रयास विफल नजर आए। पालकी और झांकियों के बीच गेप हो गया, जिससे सवारी का स्वरूप ही बिगड़ गया। विपरीत दिशा में बेरोकटोक लोग आते-जाते रहे। पालकी निकल जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने भी इन्हें रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, जबकि पालकी के पीछे भगवान के रथ व हाथी पर मुघोटे थे। गोपाल मंदिर पर पालकी रात 8.55 बजे पहंुची। इसके पहले गोपाल मंदिर के चारों ओर हजारों की संख्या में लोग जमा थे। बेरिकेडिंग के बावजूद लोग सवारी मार्ग पर आ गए। इससे पालकी आते ही अफरा-तफरी मच गई। गोपाल मंदिर से पटनी बाजार जाने वाले रास्ते पर बेरिकेडिंग के बावजूद पुलिसकर्मी आम लोगों को धक्के मारकर पीछे करते रहे।
गणगौर दरवाजा क्षेत्र में पालकी निकलने के बाद भीड़ ने बेरिकेड्स गिरा दिए। धक्का-मुक्की में कई लोग गिर गए। इनमें महिलाएं व बच्चे भी शामिल थे।
शाम 5.45 बजे : रामघाट पर महाकाल के जयकारे : रामघाट पर जब सवारी पहंुची तो सिंहस्थ जैसा नजारा दिखा। सवारी के लिए रामघाट को दोपहर 12 बजे ही खाली करा लिया था। इससे पहले सोमवती अमावस्या का स्नान हुआ।