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नेताओं के दबाव में पांच दिन में बदला आदेश, अब बगीचों में गरबों की सशर्त अनुमति
उज्जैन | करोड़ों रुपए लगाकर जिन उद्यानों को नगर निगम ने संवारा था, अब खुद का एक फैसला बदलकर उनके उजड़ने का रास्ता खोल दिया है। 13 सितंबर को सख्त हुए नगर निगम आयुक्त ने कहा था- िकसी भी उद्यान में गरबे नहीं कराए जा सकेंगे। हालांकि ये सख्ती पांच दिन तक चली राजनीति के आगे खत्म हो गई। अब गरबों के लिए सशर्त अनुमति का आदेश जारी कर दिया है।
शहर के 6 उद्यानों में बड़े गरबे होते हैं। इंदिरानगर के जिस उद्यान से गरबे का सामान जब्त किया था, उसके विकास पर ही निगम ने एक साल में 11 लाख रु. खर्च किए हैं। उद्यान पूरी तरह विकसित हो गया है। ऐसे में यहां गरबे होते हैं तो यहां विकास कार्य और हरियाली नष्ट होने में देर नहीं लगेगी। उद्यानों को बचाने के लिए निगमायुक्त डॉ विजयकुमार जे ने 13 सितंबर को आदेश जारी कर नगर के उद्यानों में गरबे और निजी आयोजनों पर रोक लगा दी थी। उन्होंने सार्वजनिक सूचना भी जारी की थी और जोनल अधिकारियों को भी ताकीद किया था कि वे उद्यानों में सूचना लगाएं। इसके बाद दबाव आते ही 18 सितंबर को निगमायुक्त ने दूसरा आदेश जारी कर दिया, जिसमें कहा अविकसित उद्यानों में जोनल अधिकारी जांच के बाद अनुमति दे सकेंगे। यह आदेश जारी करने के बाद आयुक्त अवकाश पर चले गए। शहर में निगम के 92 विकसित उद्यान हैं। इन पर वर्ष 2016-17 में 5.90 करोड़ और 2017-18 में अब तक 3.10 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इन्हें फिर से ठीक करने पर लाखों रुपए खर्च करना पड़ेंगे। 237 अविकसित उद्यानों को मिलाकर निगम के कुल 329 उद्यान हैं।
नगर निगम के झुकने के बाद वार्ड 42 में अलकापुरी के रहवासी अड़ गए हैं। उन्होंने उद्यान के बाहर बैनर लगा दिया है। अलकापुरी उत्सव समिति के इस बैनर पर लिखा है- माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार उद्यान में गरबा कार्यक्रम प्रतिबंधित है। वार्ड पार्षद राधेश्याम वर्मा को नागरिकों ने उद्यान में गरबे का आयोजन नहीं करने की सहमति दे दी है। पार्षद ने नागरिकों को ऐसे स्थान पर गरबे के लिए कहा है, जहां आवागमन बाधित न हो और किसी तरह की समस्या न आए।
महापौर की अपील और मायने
उद्यानों में गरबों को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच महापौर मीना जोनवाल ने आयोजकों से अपील की है- विकास कार्यों को सुरक्षित रखने में मदद करें। निगम परिषद ने करोड़ों रु. खर्च कर उद्यान विकसित किए हैं। आयोजन के दौरान उद्यान विकास कार्य को किसी तरह की क्षति न पहुंचे। उन्होंने कहा है कि गरबों पर रोक लगाने का उद्देश्य कभी नहीं रहा है, आयोजक विकास कार्यों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी स्वयं लें। महापौर की इस अपील का आशय यही है कि उद्यानों में गरबों पर लगाई गई रोक अब सशर्त अनुमति में बदली जा सकती है।