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40 साल की कानूनी लड़ाई के बाद उज्जैन कालभैरव मंदिर को मिला पुजारी
उज्जैन | किसी हिंदू मंदिर में एक पुजारी को नियुक्त करने के लिए अफसर को 40 पन्नों का आदेश जारी करने की बात बड़ी अचरजभरी लगती है, लेकिन यह सच है और उज्जैन के कालभैरव मंदिर के मामले में ऐसा ही हुआ है। प्रशासन के एक अफसर ने एक पुजारी को नियुक्त करने के लिए 40 पन्नों का आदेश जारी किया है।
कालभैरव मंदिर, ऐसा विचित्र मंदिर है, जहां भोग में भैरव मूर्ति को मदिरा पिलाई जाती है। इसके लिए मंदिर परिसर में बकायदा देशी और अंगे्रजी मदिरा की सरकारी दुकानें भी खोली गई हैं।
घट्टिया तहसील के एसडीएम शोभाराम सोलंकी ने मंदिर के पुजारी पद पर सदाशिव पिता सिद्धेश्वर को स्थाई रूप से नियुक्त करने का आदेश जारी किया है। दरअसल, पुजारी पद के लिए लंबे समय से कानूनी लड़ाई चली आ रही है। पुजारी की नियुक्ति करने के लिए आवेदन मंगाए गए तो 14 दावेदारों ने आवेदन भरे। 13 दावेदारों के आवेदन खारिज कर कारण भी स्पष्ट किए गए। इस कारण आदेश 40 पन्नों तक पहुंच गया।
रोचक पहलू यह भी कि मंदिर में शासकीय पुजारी पद की नियुक्ति को लेकर 40 वर्षों से कानूनी लड़ाई चल रही है। मंदिर के पुजारी रहे पं. गोपालकृष्ण चतुर्वेदी बताते हैं 1963-64 से पुजारी पद पर नियुक्ति का प्रकरण विभिन्न् न्यायालयों में चल रहा है। वर्तमान में जिला सत्र न्यायाधीश के यहां भी विचाराधीन है। इस प्रकरण के फैसले से पूर्व एसडीएम ने स्थाई नियुक्ति का कदम उठाया है।
समय बदला, दर्शनार्थी बढ़े… पर पुजारी एक
ग्वालियर रियासत के कालभैरव मंदिर में मदिरा का भोग चढ़ाने के लिए मंत्रियों से लेकर अफसर तक दरबार में हाजिर होते हैं। रियासत का समय बदल गया, दर्शनार्थियों की संख्या भी बढ़ी, लेकिन एक पुजारी को नियुक्त करने की परंपरा आज तक नहीं बदली जा सकी। मंदिर प्रबंध समिति के सचिव व तहसीलदार राजाराम करजरे कहते हैं मंदिर में कम से कम तीन पुजारियों की जरूरत है। मदिरा को भोग लगाने, पूजा करने व अन्य पूजा कर्म करने के लिए। महाकालेश्वर व मंगलनाथ मंदिर की तर्ज पर कालभैरव मंदिर में भी पुजारियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।