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लाखों के बैरिकेड्स शिप्रा नदी की बाढ़ के साथ बहे
उज्जैन। महाकालेश्वर भगवान की श्रावण-भादो मास में निकलने वाली सवारी के रामघाट पहुंचने पर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर लोक निर्माण विभाग द्वारा यहां 50 से अधिक बेरिकेड्स यहां पर रखे गये थे, लेकिन अधिकारियों ने लाखों रुपये कीमत के इन बेरिकेड्स को सवारी रामघाट से हटाना मुनासिब नहीं समझा जिसका परिणाम यह रहा कि शनिवार-रविवार को नदी में आई बाढ़ में लाखों रुपये के उक्त बेरिकेड्स पानी में बह गये जिन्हें सुबह नगर निगम की गैंग ने जेसीबी की मदद से गहरे पानी से निकाला।श्रावण-भादो मास में निकलने वाली भगवान महाकालेश्वर की सवारी का कार्यक्रम पूर्ण हुए एक माह बीतने को है, जबकि लोक निर्माण विभाग ने प्रथम सवारी के पूर्व ही रामघाट पर 50 से अधिक 7 फीट ऊंचे बेरिकेड्स रख दिये थे। सवारी के दौरान बेरिकेटिंग कर यहां भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था के उपाय किये जाते थे। शाही सवारी के बाद रामघाट पर इतनी बड़ी संख्या में बेरिकेड्स की आवश्यकता नहीं होने के बावजूद पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा उक्त बेरिकेड्स को यहां से हटाया नहीं गया जिस कारण घाटों की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
रामघाट क्षेत्र में सफाई व्यवस्था संभालने वाले मुकेश सारवान ने बताया कि नगर निगम अधिकारियों ने कई बार पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों को बेरिकेड्स हटाने के लिये अवगत कराया गया लेकिन उसके बाद भी किसी ने इन बेरिकेड्स की सुध नहीं ली। इसका परिणाम यह रहा कि शनिवार-रविवार को शिप्रा नदी में बाढ़ आने की स्थिति में सारे बेरिकेड्स घाटों से बहकर बीच नदी में और छोटे पुल की तरफ बह गये। सुबह नदी का जलस्तर कम होने के बाद घाटों की सफाई करने पहुंची नगर निगम की टीम ने गहरे पानी से जेसीबी की मदद से उक्त बेरिकेड्स को बाहर निकालकर व्यवस्थित जमाया। इन बेरिकेड्स की जालियों में कचरा व गंदगी फंसने से खराब हो चुके थे।
छोटे पुल के नीचे आया पानी
इंदौर, देवास व शहर में शुक्रवार, शनिवार को हुई तेज बारिश के बाद शिप्रा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया था और नदी में छोटे पुल से करीब 8 फीट ऊपर पानी बह रहा था। बारिश का दौर कल से थमने के बाद अब नदी में छोटे पुल के नीचे पानी बह रहा है।